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डॉक्टरों का निलंबन विवेकहीन फैसला, परिषद ने एतराज जताते हुए अव्यवस्थाओं पर सिस्टम को घेरा

चंद्रशेखर जोशी।
देहरादून के क्वारंटीन सेंटर में युवक की आत्महत्या के मामले में सेंटर के नोडल अधिकारी और एक दूसरे डॉक्टर को निलंबित करने के मामले में आयुष डॉक्टरों ने कडा ऐतराज जताया है। भारतीय चिकित्सा परिषद (uttrakhand) के सदस्य और जाने—माने आयुष चिकित्सक डा. महेंद्र राणा ने मुख्यमंत्री को पत्र​ लिखकर डॉक्टरों के निलंबन को अनुचित बताया और डॉक्टरों का निलंबन तुरंत वापस लेने की मांग की है।
डा. महेंद्र राणा ने बताया कि अपनी जान की परवाह किए बगैर डॉक्टर क्वांरटीन सेंटरों में सीमित संसाधनों के साथ काम कर रहे हैं। जबकि उन्हें पीपीई किट भी नहीं दी जा रही है। इसके बावजूद अपना फर्ज निभा रहे हैं, लेकिन जहां तक व्यवस्थाओं का सवाल है, ये पूरी तरह से प्रशासन की जिम्मेदारी है। लेकिन प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाडते हुए आत्महत्या के मामले में दो डॉक्टरों को बलि का बकरा बना दिया, जो कि पूरी तरीके से विवेकहीन नजर आती है।

सीएम को लिखा गया पत्र।

उन्होंने कहा कि क्वारंटीन सेंटरों में अव्यवस्था की बात कोई नहीं नई है पहले भी इस तरह के मामले मीडिया की सुर्खियां बनते रहे हैं। अव्यवस्था को लेकर नोडल अफसर और अन्य डॉक्टर की ओर से लिखित में कई बार आला अफसरों को अवगत कराया गया। उन्होंने सवाल पूछा कि 100 लोगों की क्षमता वाले सेंटर में क्षमता से कई अधिक लोग रखे गए थे। साथ ही प्रशासनिक अफसरों ने अव्यवस्था पर कोई कार्रवाई नहीं की। ऐसे में कोरोना के खिलाफ जंग में पहली पंक्ति में खडे हमारे डॉक्टर कैसे दोषी हैं। उन्होंने निलंबन को अनुचित बताते हुए इसे डॉक्टरों का मनोबल तोडने वाला कदम बताया है। साथ ही उनके निलंबन को तुरंत वापस किए जाने की भी मांग की है।

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