स्पर्श गंगा वाले ये भी करते हैं, क्या आप कर सकते हैं

चंद्रशेखर जोशी।
स्पर्श गंगा अभियान में लगे युवाओं की इन दिनों सोशल मीडिया पर आलोचना हो रही है। लेकिन जिस तरह से ये युवा पिछले एक साल से काम कर रहे हैं। हर रविवार को ये युवा गंगा घाटों पर सफाई अभियान चलाते हैं। रविवार को फिर इन युवा टीमों ने गंगा घाटों को साफ किया।


हालांकि आलोचना इनकी इस कारण हो रही है कि ये घाटों की सफाई करने के बहाने गंगा को प्रदूषण कर रहे हैं। लेकिन जिस वीडियो को लेकर इनकी आलोचना हो रही है उसी तरह हरकी पैडी और मालवीय घाट  व अन्य घाटों की सफाई होती है और वहां भी घाटों का पानी गंगा में जाता है। लेकिन सिर्फ एक कारण से स्पर्श गंगा को बुरा नहीं कहा जा सकता है। अगर ये युवा बिना किसी लालच के गंगा की सफाई कर रहे हैं तो इनकी हौसला अफजाई की जानी चाहिए। हां जहां तक आलोचना का प्रश्न है अगर आप सार्वजनिक जीवन में हैं तो आलोचना आपकी होनी ही है। आलोचना का ये मतलब नहीं है कि आप दूसरे को देख लेने की बात कहेंं। वहीं दूसरी ओर सुबह उठकर जिस तरह ये युवा गंगा घाटों की सफाई कर रहे हैं ये उनसे तो बेहतर हैं ही जो ऐसा नहीं करते।


स्पर्श गंगा अभियान के संयोजक शिखर पालीवाल ने बताया कि हमेें बदनाम करने की साजिश हो रही है। जो विजय गर्ग हमारी आलोचना करने पर तुले हैं और धमकाने की बात कह रहे हैं वो ही विजय गर्ग अपने किसी बिचौलिए के जरिए हमसें पैसे की डिमांड करते हैं। हम अपना काम करते रहेंगे चाहे हमारी कितनी ही आलोचना क्यों ना हो।

test by harry

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

error: Content is protected !!