ambulance is being used as personal vehicle
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करतूत: एंबुलेंस को बना दिया निजी वाहन, राजबब्बर ने सांसद निधि से दी थी, नींद में कांग्रेसी

कमल खड़का।
हरिद्वार स्वास्थ्य विभाग के कारनामों की फेहरिस्त में एक ओर कारनामा जुड गया है। उत्तराखण्ड से राज्य सभा सांसद राज बब्बर ने जो एंबुलेस वाहन स्थानीय लोगों की सेवा के लिए दी थी, उसे डिप्टी सीएमओ डा. एसडी शाक्य ने अपना निजी वाहन बना दिया है। डा. शाक्य ने एंबुलेस पर लिखे राज बब्बर सांसद निधि की पट्टी को छिपाने के लिए उस पर सफेद टेप लगा दी। जब उनसे पूछा गया पहले तो वो कहने लगे कि ऐसा नहीं एंबुलेस में निरीक्षण कि लिए हम जाते हैं। जब उनसे पूछा गया कि अगर निरीक्षण के लिए जाते हैं तो सांसद राजब्बर के नाम पर टेप क्यों लगा दी। इस सवाल पर वो बगले झांकने लगे। उन्होंने कहा कि वाहनों की कमी है तो इसका प्रयोग किया जा रहा है।
राज बब्बर ने सांसद निधि से ये एंबुलेंस 2017 में मेला अस्पताल को दी थी।

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मेला अस्तपाल ने ये एंबुलेंस कभी मरीजों के लिए प्रयोग नहीं की। क्योंकि यहां निजी एंबुलेंस चलाने वालों का नेटवर्क हैं और जिला और मेला असपताल से वो ही मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं क्योंकि सरकारी एंबुलेंस देने से मना कर दिया जाता है।
वहीं इस एंबुलेंस को अब डिप्टी सीएमओ डा. एसडी शाक्य अपने निजी वाहन के तौर पर इसे प्रयोग कर रहे हैं। सीएमओ डा. प्रेम लाल से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि मुझे इस बात की जानकारी नहीं है। मैं इसको दिखवाता हूं। लेकिन जब दोनों अधिकारी एक ही बिलिडंग में हो और दोनों की गाडियां अगल—बगल खडी हो तो ऐसे में डा. प्रेम लाल कैसे जानकारी ना होने से इनकार कर सकते हैं। कुल​ मिलाकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह लापरवाह बना हुआ है।

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कांग्रेसी नींद में
जमीन की बजाए फेसबुक और एक—दूसरे की जडों में मट्ठा देने का काम करने वाले कांग्रेसियों को जन समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। आलम ये है कि कांग्रेस के राज्य सभा सांसद की सांसद निधि का दुरुपयोग हो रहा है, इसको भी देखने वाले नहीं है। सांसद प्रतिनिधि एडवोकेट अरविंद शर्मा ने बताया कि हमने ये जनता के लिए 2017 में एंबुलेंस दी थी। अगर इसका लाभ जनता केा नहीं मिल पा रहा है तो ये स्वास्थ्य विभाग की नाकामी है। हम इसमें कार्रवाई करेंगे और जरूरत पडी तो स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ सडकों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे।
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निशंक ने भी दी थी एंबुलेंस
सांसद रमेश पोखरियाल निशंक ने भी जिला अस्पताल को एक वातानुकूलति एंबुलेंस दी थी। लेकिन इसका लाभ भी आम जनता को नहीं मिल पा रहा है। इस एंबुलेंस का प्रयोग डॉक्टर वीआईपी ड्यूटी में जाने के लिए करते हैं। जबकि जनता को निजी एंबुलेंस में पैसा खर्च करने को मजबूर होना पड रहा है।

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