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हरीश रावत ने नदियां खोदी, हमने उनकी कुर्सी खोद डाली

indexa– बागी विधायक वियज बहुगुणा पहुंचे हरिद्वार
ब्यूरो। उत्तराखंड की हरीश रावत सरकार से बगावत के सूबे की राजनीति में भूचाल लाने वाले पूर्व मुख्य्मंत्री विजय बहुगुणा शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की शरण में पहुंचे हैं। विजय बहुगुणा ने शंकराचार्य मठ पहुंचकर शंकराचार्य से भेट की और बंद कमरे में उनसे वार्तालाप किया । ऐसा माना जा रहा है की विजय बहुगुणा ने शंकराचार्य से सूबे के हालात पर विचार विमर्श किया और उनसे आवश्यक परामर्श लिया मगर इस बात को शंकराचार्य और विजय बहुगुणा दोनों ही मानने के लिए तैयार नहीं है। मगर उत्तराखंड के हालत पर पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने मीडिया से बेबाक वार्ता की और उत्तराखंड के हालत के लिए हरीश रावत को जिम्मेदार ठहराया। वे बेबाकी से कहते है की हरीश रावत ने नदियों को खोदा और हमने उनकी कुर्सी खोद दी।

उत्तराखंड में लगे राष्ट्रपति शासन को विजय बहुगुणा भारत के संविधान का हिस्सा बता रहे हैं और कह रहे है की ऐसा कोई पहली बार नहीं हुआ है की राष्ट्रपति शासन लगा है अब तक 123 बार राष्ट्रपति शासन लग चुका है। उन्होंने कहा कि जब बहुमत हार गए तो इनको त्याग पत्र दे देना चाहिए था। उनका प्रयास राष्ट्रपति शासन जल्द से जल्द हटवाने का है। अब अवैध खनन का सारा काम रूक गया है। वे हरीश रावत की नीतियों के खिलाफ हैं और शीघ्र चुनाव चाहते हैं।

विजय बहुगुणा कहते है की उनका कदम उत्तराखंड की राजनीति से प्रदूषण और भ्रष्टाचार को दूर करना है और इस बारे में वे अपने साथियों के साथ मश​िवरा कर रहे हैं। विजय बहुगुणा कह रहे है कि उत्तराखंड में सरकार किसकी बनेगी यह अधिकार राज्यपाल का है और अभी हम नौ विधायक विधानसभा से निष्कासित हैं इसलिए उनके सरकार बनाने का कोई मतलब नहीं है। वे कहते है की राजनीति में कल क्या होगा कुछ नहीं कहा जा सकता है। वे कहते हैं की इन हालत का चारधाम यात्रा पर कोई प्रभाव नहीं होगा मगर वे अधिकारीयों से सुविधाओं पर ध्यान देने पर जोर दे रहे है । उन्होंने हरीश रावत पर कटाक्ष करते हुए कहा है की उन्होंने नदिया खोदी और उन्होंने उनकी कुर्सी खोद दी ।उन्होंने हरीश रावत पर गम्भीर आरोप भी लगाए।

द्वारका  शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने  शंकराचार्य समाधी स्थल को उनको देने के लिए उत्तराखंड के राजयपाल को एक ज्ञापन देकर मांग की है। ताकि वे शंकराचार्य जयंती के दिन समाधि का शिलान्यास कर पुनर्निर्माण करवा सके क्योंकि यह केदरानाथ आपदा में क्षतिग्रस्त हो गयी थी। उन्होंने देहरादून के हवाई अड्डे का नाम भी शंकराचार्य के नाम पर करने की मांग की है ।

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