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‘संस्कृत के पंडितों ने कहा मायावती को नहीं पता मनु​स्मृति की सच्चाई’

ब्यूरो।
संस्कृत के पंडितों ने मनुस्मृति को लेकर दलितों के विरोध को अज्ञानता बताया है। उन्होंने कहा कि मनुस्मृति को लेकर कई तरह की भ्रा​तिंया हैं जो सही नहीं है। संस्कृत के विद्वान पंडित और उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पीयूषकांत दीक्षित ने गुरुवार को कहा कि मनुस्मृति को लेकर लोगों में जो धारणा है वो अज्ञानता के कारण है। कम जानकारी के कारण ही लोग इसका विरोध करते हैं। उन्होंने एक किस्से का उदाहरण देते हुए कहा कि कई वरिष्ठ विद्वानों ने जब बसपा प्रमुख मायावती से मनुस्मृति के विरोध के बारे में पूछा तो वो कोई जवाब नहीं दे पाई। मायावती मनुस्मृति के एक श्लोक के बारे में भी बता नहीं पाई।
प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में कुलपति प्रो. दीखित 12 नवंबर से होने जा रहे भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन की जानकारी देने आए थे। उत्तराखण्ड संस्कृत विवि और बाबा रामदेव का पतंजलि विश्वविद्यालय संयुक्त त्तवाधान में ये सम्मेलन हरिद्वार में करा रहा है।

हरिद्वार में प्रेस वार्ता करते प्रो. दीक्षित और प्रो. कुलवंत।
हरिद्वार में प्रेस वार्ता करते प्रो. दीक्षित और प्रो. कुलवंत।

प्रो. दीक्षित ने कहा कि मनुस्मृति को ठीक से समझने की जरूरत है। किन परिस्थितियों में प्रताडना संबंधी बात कही गई है, उसको भी ध्यान दिया जाना चाहिए। पूरी जानकारी के अभाव में मनुस्मृति का विरोध किया जा रहा है। हालांकि, जब उनसे उन परिस्थितियों के बारे में जानकारी मांगी गई तो वो कुछ नहीं बता पाए। उनके सहयोगियों ने इस बारे में सम्मेलन में चर्चा करने की बात कहकर सवाल को टाल दिया। वहीं पतंजलि विवि के प्रतिकुलपति डा. वाचस्पति कुलवंत ने कहा कि मनुस्मृति को लेकर जो धारणा है वो वर्तमान समय में ज्वलंत विषय है। इस विषय पर भी सम्मेलन में चर्चा की जाएगी। वहीं प्रो. महावीर अग्रवाल ने कहा कि मध्ययुग में मनुस्मृति में छेडछाड की गई। इसके कारण ये स्थिति आई है। मनुस्मृति को लेकर तमाम भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन के जरिए भारतीय प्राच्य विद्याओं के बारे में देश के करीब दो हजार विद्वान पंडित भाग ले रहे हैं।

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