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कुंभ मेलाधिकारी के गंगा में जूते पहन कर उतरने से तीर्थ पुरोहित समाज में दो फाड़, किसने क्या कहा ​पढ़िए

रतनमणी डोभाल।
कुंभ मेलाधिकारी दीपक रावत गंगा सफाई के दौरान जूते पहन कर गंगा में उतरने के विवाद में तीर्थ पुरोहित समाज भी बंट गया है। एक धडा जहां दीपक रावत का पूरी तरह समर्थन कर रहा है, वहीं दूसरा ग्रुप घटना को आस्था से खिलवाड होना बता रहा है। हालांकि इस पूरे मामले को गंगा सभा और तीर्थ पुरोहित समाज की अंदरूनी राजनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। वहीं सोशल मीडिया पर भी इस मामले में राय बटी हुई है।
रविवार को गंगा सफाई के दौरान मेलाधिकारी दीपक रावत, अपर मेलाधिकारी हरबीर सिंह और अन्य कुछ लोग गंगा में सफाई के दौरान जूता पहन कर उतर गए थे। इस दौरान वहां गंगा सभा के पदाधिकारी और अन्य स्वयंसेवी भी थे। सोशल मीडिया पर फोटो वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकडा तो तीर्थ पुरोहित समाज भी इस मामले में विभाजित हो गया। श्री गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने बताया कि मेलाधिकारी दीपक रावत हरकी पैडी पर नहीं बल्कि सुभाष घाट पर जूते पहने दिख रहे हैं और जब उन्होंने हम सभी को नंगे पैर देखा तो तुरंत उन्होंने अपने जूते उतार दिए। इस मामले को तूल नहीं देना चाहिए। जो इस मामले को तूल दे रहे हैं वो गलत कर रहे हैं। वहीं तीर्थ पुरोहित उज्जवल पंडित ने कहा कि मेलाधिकारी दीपक रावत गंगा में नहीं उतरे, ये सरासर गलत है। जो इस मामले को तूल दे रहे हैं वो सिर्फ पब्लिसिटी स्टंट हैं। इसमें कोई आस्था को ठेस नहीं पहुंची है।
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तीर्थ पुरोहित के दूसरे धडे ने किया विरोध
हरकी पैडी से गुजरने वाली धारा को स्केप चैनल घोषित करने के विरोध पिछले तीस दिनों से आंदोलन कर रहे है तीर्थ पुरोहित सौरभ सिखौला ने कहा कि गंगा में जूते पहन कर उतरना महापाप है। मेलाधिकारी दीपक रावत ने सभी गंगा भक्तों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। हैरानी की बात ये है कि गंगा सभा के पदाधिकारियों की मौजूदगी में ये सब हुआ है, लेकिन उन्होंने कोई आवाज नहीं उठाई। उन्होंने कहा कि ये पदाधिकारी अपनी नैतिक जिम्मेदारी भूल गए हैं और अब इनमें तीर्थ पुरोहित समाज का विश्वास उठ गया है। उन्होंने ये भी कहा ​कि भविष्य में इस मामले में विरोध दर्ज कराया जाएगा।

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आपको बता दें कि इस मामले में गुरुकुल कांगडी विवि के छात्र मयूरेश उप्रेती ने नगर केातवाली पुलिस को दीपक रावत व अन्य अफसरों के खिलाफ केस दर्ज करने की तहरीर दी थी। लेकिन, इस मामले में अभी तक कोई कार्रवाई नही की गई है। वहीं सोशल मीडिया में भी इस मामले में राय बंटी हुई है। कुछ लोग दीपक रावत का विरोध कर रहे हैं तो कई ऐसे हैं जिन्होंने दीपक रावत का समर्थन भी किया है। समर्थन करने वाले ये भी पूछ रहे हैं कि हरकी पैडी से गुजरने वाली धारा गंगा है या फिर नहर। तीर्थ पुरोहित समाज को ये भी स्पष्ट कर देना चाहिए। कुछ ने कहा कि सफाई के लिए मेलाधिकारी दीपक रावत गए थे, उनके इस काम में कुछ भी गलत नहीं है।

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