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‘शेषराज सैनी के जरिए स्वामी ने की सैनियों की गोलबंदी, विरोधियों को नुकसान’

एसएन चौधरी।
स्थानीय प्रत्याशी के मसले पर भाजपा के ही एक गुट का विरोध झेल रहे स्वामी यतीश्वरानंद ने शेषराज सैनी के जरिए सैनियों की गोलबंदी कर इस गुट की ताकत को कमजोर करने का काम किया है। सैनी वोटबैंक का अधिकतर हिस्सा शुरू से ही भाजपा के पाले में गिरता रहा है लेकिन स्थानीय चौहानों के विरोध के चलते सैनियों में भी सेंधमारी का डर स्वामी यतीश्वरानंद को सता रहा था। लिहाजा, बसपा में हाशिये पर चल रहे सैनियों के बडे नेता शेषराज सैनी को स्वामी ने अपने पाले में लाकर सैनियों की गोलबंदी कर दी है। इसका फायदा उन्हें चुनाव में मिल सकता है।
शेषराज सैनी पिछले दो दशकों से बसपा के साथ जुडे थे। पिछले विधानसभा चुनाव में शेषराज सैनी तीसरे नंबर पर आए थे। उन्हें करीब बीस हजार वोट मिले थे। इस बार भी वो चुनाव लडना चाहते थे। लेकिन चुनाव हारने के बाद लगातार बसपा में शेषराज हाशिये पर पडे थे। हालांकि, शेषराज का दावा है कि बसपा इस बार भी उन्हें उम्मीदवार बनाना चाहती थी। लेकिन उन्होंने राज्य की सियासी हालात को देखकर भाजपा में आने का फैसला लिया है।
वहीं शेषराज सैनी के आने से भाजपा सैनी वोटबैंक और ज्यादा पक्का हो गया है। इसके साथ ही शेषराज सैनी के पास कुछ अपना वोट बैंक भी है जिसका फायदा स्वामी यतीश्वरानंद को मिल सकता है। लेकिन, इसका सबसे ज्यादा नुकसार स्वामी का विरोध कर निर्दलीय उम्मीदवार को मैदान में उतारने वाले अर्जुन चौहान गुट को होने की संभावना है। चूंकि स्थानीय प्रत्याशी के सवाल पर चौहान गुट स्वामी यतीश्वरानंद के खिलाफ दूसरी जातियों को भी लामबंद करने में लगा है। ऐसे में सैनियों की गोलबंदी से इस गुट को नुकसान हो सकता है। सैनी समाज का करीब दस से बारह हजार वोट हरिद्वार ग्रामीण सीट पर है जो जीत और हार का समीकरण तय करता है। सैनी वोटबैंक का अधिकतर हिस्सा शुरू से ही भाजपा के साथ रहा है। ऐसे में इसकी और ज्यादा गोलबंदी होने से भाजपा को इसका फायदा मिलेगा।

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