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‘गुजरात दंगों में पीएम नरेंद्र मोदी—अमित शाह की भूमिका’ बोले हार्दिक पटेल

ब्यूरो।
पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल ने पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर एक बार फिर हल्ला बोला है। उन्होंने गुजरात दंगों के पीछे दोनों नेताओं की कथित भूमिका पर भी टिप्पणी की। आरक्षण ये लेकर अपने राजनीति में आने या ना आने पर भी उन्होंने हमसे बात की। आइये जानते हैं उन्होंने क्या कहा…

 

प्रश्न—क्या आरक्षण ही आपकी समस्या का एक मात्र हल है।
उत्तर— आरक्षण हमारा हक है। हम गुजरात में लगातार पिछड रहे हैं। शिक्षा का बाजारीकरण कर दिया गया है। हमारे बच्चों को 90 प्रतिशत अंक लाकर भी इंजीनियरिंग और मेडिकल में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। हम अपनी आर्थिक तरक्की के लिए आरक्षण चाहते हैं जो संविधान ने हमें दिया है। हम संविधान के इतर कुछ भी नहीं मांग रहे हैं।

 

प्रश्न— क्या आपको लगता है कि आरक्षण आर्थिक आधार पर होना चाहिए।
उत्तर— हिंदुस्तान के संविधान में आर्थिक आधार पर कुछ नहीं हो सकता है। सिर्फ बातें हो सकती हैं। हमारी एक ही लाइन है जिसकी जितनी हिस्सेदारी उसे उतनी भागीदारी मिलनी चाहिए। ऐसा ना हुआ तो आरक्षण सिर्फ जुमला ही बनकर रह जाएगा। ओबामा या ट्रंप भी आ जाए तो भी आरक्षण आर्थिक आधार पर नहीं कर सकते।

 

प्रश्न— क्या दूसरे राज्यों में चल रहे आरक्षण आंदोलनों को आप सपोर्ट करते हैं।
उत्तर— आरक्षण के मसले पर हम सभी को सपोर्ट करते हैं। आरक्षण देश के संविधान में हैं और हमें ये मिलना चाहिए। हमारे संविधान निर्माता डा. बाबा साहेब अंबेडकर ने हमें ये हक दिया है। इसके जरिए हम विकास कर सकते हैं और देश को आगे ले जा सकते हैं।

 

प्रश्न— क्या आप अपनी पार्टी बनाएंगे या फिर किसी राजनीतिक दल का हिस्सा होंगे।
उत्तर— नहीं मैं कोई पार्टी नहीं बनाउंगा। अभी राजनीति ज्वाइन करने का समय नहीं है। मैं अभी अनुभव ले रहा हूं। समय आने पर सही निर्णय लिया जाएगा।

 

प्रश्न— आपके अरविंद केजरीवाल से अच्छे संबंध हैं। क्या कारण है इनका।
उत्तर— मेरे सभी से अच्छे संबंध हैं। नीतिश, ममता जी से भी अच्छे संबंध हैं। हरीश रावत जी से भी अच्छे संबंध है। लेकिन विचारधारा का मुख्य मसला होता है। मुझे तो बीजेपी भी अच्छी लगती है, नाम अच्छा है भारतीय जनता पार्टी लेकिन उनकी विचारधारा और लोग गलत हैं। कांग्रेस भी अच्छी पार्टी हैं। मेरा राजनीतिक रिश्ता किसी से नहीं है। जो देश के विकास और भलाई के लिए काम करता हैं हम उसके साथ हैं।

 

प्रश्न— हाल ही में हुए उपचुनावों में बीजेपी को जीत हासिल हुए हैं। आप इसे किस तरीके से देखते हैं।
उत्तर— 2015 के पंचायत चुनाव में भाजपा को मुंह की खानी पडी थी। इस चुनाव में भाजपा धनबल और डरा धमकाकर चुनाव जीता हैं। खासतौर पर उन इलाकों मं भाजपा जीती हैं जहां उनका गढ रहा हैं। लेकिन हमारे इलाकों में भाजपा को हार का सामना करना पडा है।
प्रश्न— आने वाले गुजरात चुनाव में आपकी भूमिका क्या रहेगी।
उत्तर— हम पूरे दम के साथ भाजपा को हराने का काम करेंगे। क्योंकि उन्होंने हम पर अत्याचार किया है। हम भाजपा के अत्याचार को कभी नहीं भूल सकते हैं। हम ये नहीं कहते हैं कि किस पार्टी को सपोर्ट करेंगे, लेकिन हम भाजपा का सपोर्ट नहीं करेंगे।

 
प्रश्न— आरक्षण के मसले पर गुजरात सरकार के प्रयास को किसी तरह से देखते हैं।
उत्तर— सरकार कुछ नही कर रही है। सरकार का प्रयास हमारे आंदोलन को खत्म करना हैं। हमारी मांगों पर गुजरात सरकार गंभीर नहीं है। गुजरात की राजनीति पूरी तरह से दिल्ली से चलती है। विजय रूपाणी को अमित शाह चलाते हैं। आनंदी बेन पटेल को मोदी चला रहे थे। दोनों समाज के खिलाफ काम कर रहे हैं। एक एक्शन ये अपनी मर्जी से नहीं ले सकते हैं। सब दिल्ली से हेंडिल हो रहा है। इससे गुजरात का नुकसान हो रहा है।

 

प्रश्न— नरेंद्र मोदी सरकार को किस तरह से आंकते हैं।
उत्तर— नरेंद्र मोदी सरकार हर मोर्च पर नाकाम रही है। मोदी सरकार का एक ही काम हैं मुद्दों से जनता को भटकाना। एक मुद्दे पर जनता का ध्यान आने से पहले ही उसे दूसरी घटना में उलझा दिया जाता है। मोदी जी की एक अच्छाई हैं कि उन्होंने हमे ये दिखा दिया कि हिटलर कैसा होता है। हमने हिटलर तो नहीं देखा लेकिन हिटलरशाही को जरूर देख लिया है।

 
प्रश्न— नोटबंदी को किस तरह से देखते हैं।
उत्तर— भ्रष्टाचार के हम खिलाफ हैं, लेकिन नोटबंदी पर मोदी सरकार के सारे आंकडे फेल हो गए हैं। अंबानी और अडानी तो लाइन में नहीं है, उसे तो परेशानी नहीं हो रही है। इससे आम आदमी को परेशानी हो रही है। ये एक जुमला है सर्जिकल स्ट्राइक का गुब्बारा फुस होने के बाद ये काम किया गया है।

 
प्रश्न— गुजरात दंगों में किस तरीके से दोनों की कथित भूमिका को देखते हैं। 

उत्तर— इन्होंने हिंदुओं की आस्था से खिलवाड किया है। दंगों के पीछे ये ही लोग थे। उन्होंने कहा कि कोर्ट की क्लीन चिट को हम मान सकते हैं, लेकिन दंगों के पीछे ये ही लोग थे ये हमको कहना ही पडेगा। हालांकि, मुझे पता है कि ये कहने के बाद मुझ पर और ज्यादा केस होंगे। लेकिन सच तो हमें बोलना ही पडेगा। आज सबसे बडी समस्या ये है कि कोई सच बोलने को राजी नहीं है। सच्चाई के लिए लडने ​की हिम्मत खत्म हो गई है। इन लोगों ने हिंदुओं का प्रयोग किया। आज जो लोग जेल में है क्या उनकी सुध लेने कोई जा रहा है। किसी ने उनकी मदद नही की।

 
प्रश्न— क्या देशद्रोह का कानून खत्म कर देना चाहिए।
उत्तर— देशद्रोह देश के युवाओं के लिए नहीं हैं। ये उन लोगों के लिए हैं जो कोर्ट के अंदर बैठकर पैसे के बल पर फैसले कर रहे हैं। जो कालाधन एकत्र कर रहे हैं। जो धर्म के नाम दंगे कराने वालों पर दोशद्रोह लगना चाहिए। धार्मिक उन्माद पैदा करने वालों पर देशद्रोह लगना चाहिए। अपने समाज के हक की मांग उठा रहे युवाओं पर आप देशद्रोह लगाकर क्या साबित करना चाहते हैं। आप ऐसा करोगे तो हजारों युवा खडे हो जाएंगे। आप युवाओं को प्रताडित करोगे तो युवा नक्सली ही बनेगा। हमें देश में ऐसा माहौल बनाना चाहिए ताकि युवा गुमराही के रास्तें से बाहर आ सके और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख सके।
प्रश्न— आपकी आगे की रणनीति क्या रहेगी।
उत्तर— हमें आरक्षण नहीं मिलेगा तो हम लडाई लडेंगे। ये सरकार जाएगी, अब ​फिर से दंगल होगा और 17 जनवरी को हम जा रहे हैं। हमें जेल में डाला कोई बात नहीं लेकिन हम इससे नहीं डरेंगे। हम हर मोर्च पर भाजपा के खिलाफ जंग जारी रखेंगे।

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