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‘लालकुआं सीट पर मुस्लिम—दलितों के हाथ में जीत की चाबी’

मोहन जोशी,लालकुआं
वीआईपी सीटों में शुमार लालकुआं विधानसभा में कांग्रेस-भाजपा के बीच सीधी जंग में मुस्लिम मतदाता जहां निणार्यक भूमिका अदा करेगें वहीं दलितों का वोट भी प्रत्याशियों के भाग्य फैसला करने में अहम भूमिका तय करेगा। गौरतलब है कि विधानसभा लालकुआं में  मतदाताओं की संख्या 1 लाख 8 हजार 512 है जिनमें महिला मतदाता 57 हजार 433 व पुरुष मतदाता 51 हजार उन्नासी है। जातिगत आधार पर देखें तो लालकुआं विधानसभा में क्षत्रिय मतदाता 34 प्रतिशत, बाह्रम्ण 26 प्रतिशत, दलित 18 प्रतिशत, मुस्लिम 13 प्रतिशत, पंजाबी 3 प्रतिशत,वैश्य 2 प्रतिशत व अन्य वर्ग के 4 प्रतिशत मतदाता है। इस लिहाज से देखें तो मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 14 हजार जबकि दलित मतदाताओं की संख्या 19 हजार के करीब है पिछले चुनावों के आंकड़ों पर गौर करें तो मुस्लिम व दलित मतदाताओं का रुझान हमेशा कांग्रेस की ओर ही रहा है जिसका मुख्य कारण यहाँ पर सपा-बसपा का सांगठनिक ढांचा प्रभावहीन है इस बार भी सपा,बसपा व उक्रांद समेत अन्य दलों का यहाँ पर कोई जनाधार नहीं है जिसके चलते मुस्लिम व दलित समाज का रुझान कांग्रेस पार्टी की ओर बना हुआ है। मुस्लिम व दलित वोट बैंक में गहरी पैठ के कारण कांग्रेस का पलड़ा बहुत भारी माना जा रहा है बशर्ते की कांग्रेसी आपस में एकजुट हो सकें लेकिन कांग्रेसी कुनबे में फूट इस कदर बढ़ गई है कि अब इनमें एका होने के आसार कम ही नजर आ रहे है वर्तमान में यहाँ से पीडीएफ के विधायक हरीश चन्द्र दुर्गापाल है पांच साल सरकार का साथ देने की एवज में उनका टिकट कांग्रेस से लगभग फाइनल माना जा रहा है जबकि दूसरी ओर कांग्रेस से दावेदारों की लम्बी फौज टिकट की होड़  में लगी हुई है जिनमें 2012 में कांग्रेस के प्रत्याशी रह चुके हरेन्द्र बोरा, नितिन पंत, संध्या डालाकोटी, बीना जोशी, किरन जोशी, राजेन्द्र खनवाल प्रमुख है पूर्व प्रत्याशी हरेन्द्र बोरा तो टिकट न मिलने पर निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके है मुस्लिम व दलित वोटों के आंकड़ों का गणित माने तो यदि पीडीऍफ़ या अन्य आधा दर्जन कांग्रेसी दावेदारों में से किसी को भी टिकट मिलता है तो यह सीट आसानी से कांग्रेस की झोली में आ सकती है शर्त यह है कि कांग्रेसी बगावत न कर आम सहमती से  कांग्रेस प्रत्याशी को चुनाव लडाएं  यदि कांग्रेस में बगावत होती है जिसके अभी तक पूरे आसार नजर आ रहे है तो यह कांग्रेस की सुरक्षित सीट भाजपा के पाले में सरक जाएगी।

दावेदारों में घमासान
लालकुआं। कांग्रेस की जीत के लिए महफूज सीट माने जाने वाली लालकुआं विधानसभा में दावेदारों की लम्बी फौज व उनमें आपसी मनमुटाव के चलते कांग्रेस हाईकमान को यहाँ से प्रत्याशी घोषित करना बहुत ही जटिल  प्रक्रिया साबित होगा थोड़ी सी चूक होने पर जीती जिताई सीट से कांग्रेस को यहाँ पर हार का मुंह भी देखना पड़ सकता है पीडीऍफ़ के हरीश चन्द्र दुर्गापाल व कांग्रेस के आधा दर्जन दावेदारों  में  अब कांग्रेस हाईकमान यहाँ पर कैसे मैनेज करता है कि बगावत न हो यह देखने वाली बात होगी।

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