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एक्सक्लूसिव: 23 करोड़ की सड़क बनाकर याद आया नदी पर पुल तो है ही नहीं, अजब विभाग की गजब कहानी

रतनमणी डोभाल।
जनता पर विभिन्न टैक्स लगाकर​ अर्जित किए गए धन की बंदरबांट कैसे होती है, इसका ताजा उदाहरण कुंभ मेला 2021 से बनाई जा रही सिडकुल धनौरी डबल लेन सड़क पर देखा जा रहा है। करीब 23 करोड़ 49 लाख रुपए की लागत से इस लेन का निर्माण करीब पूरा होने को है लेकिन विभागीय लापरवाही का इससे बना नमूना और क्या होगा कि इस मार्ग पर पड़ने वाली बरसाती नदी पथरी रौ पर पुल का निर्माण किए बिना ही सड़क का निर्माण कर दिया गया। वहीं गंगनहर पर बने जिस पुल से भारी वाहन को गुजारा जाना है उसकी भी मियाद पूरी हो चुकी है। आला अफसरों ने जब विभाग की इस लापरवाही को पकड़ा तो अपनी कमियां छुपाने के लिए नदी पर अब रपटा बनाकर खानापूर्ति की जा रही है। वहीं अफसरों का दावा है कि पुल की डीपीआर तैयार हो चुकी है और जल्द ही पुल भी बन जाएगा वो भी कुंभ के बाद। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि जब तक पुल बनेगा तब तक 23 करोड़ 49 लाख की लागत से बनी सडक खस्ताहाल हो चुकी होगी। वैसे भी सडक निर्माण की गुणवत्ता किसी से छिपी नहीं है।

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उत्तराखण्ड सिंचाई विभाग बना रहा है डबल लेन सडक़——
सिंचाई विभाग कुंभ योजना 2021 के अंतर्गत सिडकुल से धनोरी तक डबल लेन का निर्माण करा रहा है। लगभग 23 करोड 49 लाख की लागत से निर्माणाधीन इस सड़क की लंबाई लगभग 8.40 किलोमीटर है।
कुंभ मेला हाईपावर कमेटी ने भी बिना जांच पड़ताल के सड़क को हरी झंडी दी। किसी ने भी पर ध्यान नहीं दिया है कि आखिर सड़क को धनोरी से भगवानपुर जाने वाले रोड से कैसे जोड़ा जाएगा।
सिडकुल से धनोरी पहुंचने वाली सड़क को जहां खत्म होना है। वहां नहर पर जो पुल है वह हो ब्रिटिश काल का 160 साल पुराना है जिसको यातायात के लिए उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने बंद कर दिया है इस पुल के मियाद कब की पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद उत्तराखंड सिंचाई विभाग के महान इंजीनियरों ने सड़क का बनाने की योजना को तो अमलीजामा पहनाया लेकिन सड़क घर से बाहर कैसे जाएगी इस पर विचार ही नहीं किया है।
कुंभ मेला अधिकारी दीपक रावत ने निरीक्षण में इस खाने को पकड़ा था। उन्होंने बिना पुल के सड़क बनाने की योजना पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए जांच के आदेश दिए थे। मेला अधिकारी के आदेश को भी सिंचाई विभाग के अधिकारी तब जागे हैं और आप कुंभ के बाद सड़क को जोड़ने के लिए पुल बनाने की बात कह रहे हैं। इसका मतलब साफ है कि जिस सड़क पर इतनी भारी भरकम खर्च किया जा रहा है, वो बिना पुल बेकार ही है।

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सिडकुल की स्थापना से ही इस सड़क की आवश्यकता महसूस की जा रही थी
सिडकुल की स्थापना से ही उसके लिए एक अलग सड़क बनाने की मांग की जाती रही है। हरिद्वार में यात्रा सीजन, कांवड़ यात्रा के के समय लगने वाले जाम तथा प्रशासन द्वारा हाईवे को बंद किए जाने के कारण सिडकुल के उद्योगों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। हाईवे बंद होने से सिडकुल सेना तो तैयार माल बाहर जा पाता और ना कच्चा माल सिडकुल आप आता है। जाम से सिडकुल की औद्योगिक गतिविधियां प्रभावित ना हो इसके लिए अलग सड़क बनाने की योजना पर विचार किया गया था। कुंभ मेला 2010 की योजना में भी सिडकुल से धनोरी तक डबल लेन सड़क की योजना का प्रस्ताव किया गया था। लेकिन तब फॉरेस्ट विभाग ने सड़क के मार्ग में आने वाले पेड़ों को काटने की अनुमति नहीं दी थी। जिस कारण 2010 यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई।
कुंभ 2021 योजना में सड़क की योजनाओं को स्वीकृति तो मिली लेकिन योजना बनाने वाले इंजीनियरों ने दफ्तरों में बैठकर ही कागजों पर सड़क बना दी। अधिकारी मौके पर गए होते तो निश्चित रूप से वह देख पाते की इस सड़क के लिए पुल की भी आवश्यकता है।

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क्या कहते हैं अधिकारी———
इस संबंध में सिंचाई कार्य मंडल हरिद्वार के अधीक्षण अभियंता एनके सिंह ने माना कि इस सड़क की योजना में पुल शामिल न करना एक बड़ी त्रुटि है। उन्होंने बताया कि शासन ने नया पुल बनाने की स्वीकृति दे दी है जिसकी डीपीआर तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि लगभग 90 मीटर का स्पान पुल का डिजाइन तैयार किया जा रहा है। लेकिन पुल का निर्माण कुंभ के बाद ही शुरू हो पाएगा। इसका मतलब साफ है कि सिडकुल धनोरी डबल लाइन मार्ग प्ले जब तक पुल बनेगा तब तक यह सड़क खत्म हो जाएगी और ₹21करोड़ रुपए बर्बाद हो जाएंगे।

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ज्वालापुर से भाजपा विधायक ने शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक पर साधा निशाना
ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र विधायक राठौर ने शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक के सिर ठीकरा फोड़ते हुए आरोप लगाया कि मेला योजना के सारे कार्यों की स्वीकृति शहरी विकास विभाग से हो रही है। मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद भी उनके क्षेत्र के कार्य शहरी विकास विभाग नहीं होने दे रहा है। क्रोधित विधायक सुरेश राठौर ने बताया कि 9 अक्टूबर 2019 की कुंभ मेला बैठक में क्षेत्र के विकास कार्यों प्रस्ताव दिया था। इसके बाद 3 स्मरण पत्र मेलाधिकारी को दिए परंतु कोई काम नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि पुल बनाने के स्थान पर नदी में रपटा बना कर धन बर्बाद किया जा रहा है। रपटा तो नदी बह जाएगा। सिंचाई विभाग के अधिकारियों को मौके पर ले जाकर दिखाया भी, परंतु मनमर्जी से सारे काम हो रहे हैं। विधायक सुरेश राठौर ने कहा हम कर सकते हैं हम याचक है और मंत्री मदन कौशिक दाता है।

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