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एक अघोरी ने कैसे बदल डाला स्वामी कैलाशानंद का जीवन

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एक अघोरी ने कैसे बदल डाला स्वामी कैलाशानंद का जीवन
ब्यूरो।
हरिद्वार दक्षिण काली मंदिर पीठाधीश्वर और वर्तमान में यूपी के सबसे शक्तिशाली परिवार मुलायम सिंह यादव के धर्मगुरु स्वामी कैलाशानंद का जीवन तामसिक पंथ के एक ओघड़ ने बहुत हद तक प्रभावित किया है। स्वामी कैलाशानंद महाराज वर्ष 2006 से पहले तक हरिद्वार कभी आए भी नहीं थे। उनका जीवन काशी से लेकर त्रयंबकेश्वर, नासिक, अयोध्या और मथुरा में ही गुजरा था। संन्यास पंरपरा में आने के बाद वो 2006 में वो अपने दो यजमानों के साथ ऋषिकेश जा रहे थे। तब भी उन्हें पता नहीं था कि वो कभी हरिद्वार आएंगे और यहां की सबसे प्रसिद्ध पीठ के महंत बनेंगे। असल में उन्हें मोतीचूर रेलवे फाटक के पास एक ओघड़ महाराज दिखे। उन्होंने अपनी कार रूकवाई और उस अघोरी से मिलने चल दिए। स्वामी कैलाशानंद ने अघोरी से आशीर्वाद लेने का प्रयास किया। इस दौरान अघोरी ने उन्हें अपने झोले में रखे मांस को देने का प्रयास किया, लेकिन स्वामी कैलाशानंद ने इसे मना कर दिया और अपने बारे में बताया। इस पर ओघड़ ने कहा वापस जाते हुए हरिद्वार होते जाना, वहां तुम्हारा कोई इंतजार कर रहा है। हालांकि चंद पलों की मुलाकात के बाद अघोरी वहां से चला गया और स्वामी कैलाशानंद अपने यजमानों के साथ अपनी मंजिल की ओर कूच कर गए। इसके बाद कैलाशानंद अपने कुछ भक्तों के साथ हरिद्वार आए और सीधे नीलधारा के किनारे बसे सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर पर पहुंच गए। स्वामी कैलाशानंद ने हमसे बात करते हुए बताया कि ये उस वक्त यहां मंदिर के अलावा कुछ नहीं था। आंगन में गुलदार घूमा करते थे। इसके बाद उन्हें यहां के महंत ने कुछ दिन रूकने के लिए कहा और इसके बाद जो हुआ वो सबके सामने हैं। आज दक्षिण काली मंदिर परिसर का पूरा ही स्वरूप ही बदला हुआ है। यहां साफ पक्के घाट बना दिए गए हैं, जिससे घाटों पर पसरी गंदगी दूर हो गई है। एक विद्धवान संत होने के साथ—साथ इस पीठ के महंत और अग्नि अखाड़े के महामंडलेश्वर होने के नाते आज उनके पास खासोआम भक्त उनसे आशीर्वाद लेने आते हैं। वो उन चंद संतों में से एक हैं जिनके पास हर पार्टी के नेता आते हैं और आश्रम में रूकते भी हैं।

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