758वें सालाना उर्स की सफलता की सबसे बड़ी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन के कंधों पर

अतीक साबरी

पिरान कलियर। विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक के 758वें सालाना उर्स का शुभारंभ होने जा रहा है। देश-विदेश से लाखों जायरीन दरगाह में हाजिरी देने पहुंचेंगे। ऐसे में पूरे उर्स मेले को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने की सबसे बड़ी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन के कंधों पर रहेगी।

उर्स के दौरान दरगाह की सभी प्रमुख धार्मिक रस्में, जायरीनों की आवाजाही, भीड़ प्रबंधन, यातायात व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था तथा मेले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने का कार्य पुलिस प्रशासन की सतर्क निगरानी में संपन्न कराया जाता है। दरगाह प्रशासन और पुलिस प्रशासन के आपसी समन्वय से ही हर वर्ष उर्स सकुशल संपन्न होता है।

इस बार भी हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में संयुक्त मजिस्ट्रेट दीपक रामचन्द्र सेठ, एसपी देहात शेखर चंद्र स्याल तथा कोतवाली पिरान कलियर प्रभारी निरीक्षक कमल मोहन भंडारी के नेतृत्व में व्यापक सुरक्षा एवं व्यवस्थाओं की रूपरेखा तैयार की जा रही है। उर्स मेले के दौरान पुलिस बल चौबीसों घंटे विभिन्न स्थानों पर तैनात रहेगा ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना की संभावना को समय रहते रोका जा सके।

दरगाह परिसर में होने वाली मुख्य रस्मों के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। ऐसे में भीड़ को नियंत्रित करना, जायरीनों को सुरक्षित तरीके से जियारत कराना, महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा किसी भी तरह की अव्यवस्था को रोकना पुलिस की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होती है।इसके अलावा दरगाह के चारों ओर लगने वाले अस्थायी बाजार, मेन बाजार, झूले, सर्कस, पार्किंग स्थल और प्रमुख मार्गों पर भी पुलिस की विशेष नजर रहेगी। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना, जाम की स्थिति से निपटना, खोया-पाया केंद्रों का संचालन, संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी रखना तथा मेले में किसी भी प्रकार के विवाद या झगड़े को रोकना भी पुलिस प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।

उर्स में आने वाले लाखों जायरीनों के लिए सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना पुलिस प्रशासन की सबसे बड़ी परीक्षा होती है। यही कारण है कि हर वर्ष महीनों पहले से सुरक्षा रणनीति तैयार की जाती है और विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर व्यापक इंतजाम किए जाते हैं।विश्व प्रसिद्ध साबिर पाक का उर्स केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे का प्रतीक भी है।

ऐसे भव्य आयोजन की सफलता पुलिस, प्रशासन और दरगाह प्रबंधन के बेहतर तालमेल पर निर्भर करती है। उम्मीद है कि इस वर्ष भी सभी विभागों के समन्वित प्रयासों से 758वां सालाना उर्स पूरी श्रद्धा, शांति और गरिमा के साथ संपन्न होगा तथा देश-विदेश से आने वाले जायरीन सुखद अनुभव लेकर अपने घर लौटेंगे।