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हरिद्वार। हरिद्वार पुलिस ने महज 72 घंटे के भीतर अंतरराज्यीय बच्चा चोरी एवं मानव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश कर बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने गिरोह की दो महिला सदस्यों सहित कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार करते हुए उनके चंगुल से दो मासूम बच्चों को सकुशल मुक्त कराया है। इस कार्रवाई को हरिद्वार पुलिस की हाल के वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धियों में माना जा रहा है।
मामला 6 जून 2026 का है, जब बैरागी कैंप स्थित झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले विनोद सोलंकी की तीन वर्षीय बेटी राधिका अचानक लापता हो गई। परिजनों की शिकायत पर कनखल कोतवाली में अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी नवनीत सिंह ने स्वयं जांच की मॉनिटरिंग संभाली और विशेष पुलिस टीमों का गठन कर बच्ची की सकुशल बरामदगी के निर्देश दिए।
पुलिस ने डिजिटल और मैनुअल जांच का सहारा लेते हुए सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज खंगाले, डंप डाटा का विश्लेषण किया तथा मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया। कई दिनों की लगातार मेहनत के बाद पुलिस बच्चा चोरी करने वाले संगठित गिरोह तक पहुंचने में सफल रही।जांच के दौरान पुलिस ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में ताबड़तोड़ दबिश देकर गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस कार्रवाई से घबराए गिरोह के अन्य सदस्य अपहृत बच्ची राधिका को दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर लावारिस छोड़कर फरार हो गए। आरपीएफ की सूचना पर दिल्ली पहुंची हरिद्वार पुलिस टीम ने बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया।पूछताछ में एक और सनसनीखेज खुलासा हुआ। आरोपियों ने बताया कि 24 मई को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से चोरी किए गए करीब डेढ़ वर्षीय बच्चे कार्तिक को डेढ़ लाख रुपये में बदायूं में बेच दिया गया था।
पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए कार्तिक को भी सकुशल बरामद कर लिया।जांच में सामने आया कि गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। गिरोह के सदस्य बच्चों की चोरी, उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, ग्राहक तलाशने, सौदा तय करने और फर्जी माता-पिता बनकर बच्चों को बेचने तक की जिम्मेदारियां बांटकर काम करते थे। बच्चों की कीमत दो लाख से पांच लाख रुपये तक तय की जाती थी और निशाने पर मुख्य रूप से निसंतान दंपति रहते थे।
पुलिस के अनुसार गिरोह का सरगना मोहम्मद आकिल और महिला आरोपी प्रीति शर्मा बच्चों के रेट तय करने और उन्हें अपना या अनाथ बताकर बेचने का काम करते थे। गिरोह की जड़ें उत्तर प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड तक फैली हुई मिली हैं। मामले में अब मानव तस्करी की धाराएं भी बढ़ाई गई हैं।एसएसपी नवनीत सिंह ने कहा कि यह सिर्फ एक आपराधिक गिरोह का खुलासा नहीं बल्कि एक मां से किया गया वादा निभाने की सफलता है।
पुलिस की प्राथमिकता बच्ची को सकुशल परिवार तक पहुंचाना था, जिसे टीम ने पूरी निष्ठा और मेहनत से पूरा किया।गिरफ्तार आरोपियों में मोहम्मद आकिल, नसीमा, जुल्फेकार, धर्मेंद्र कुमार, प्रीति शर्मा और शिवा सिंह उर्फ गौरव शामिल हैं। सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है तथा गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।इस पूरे ऑपरेशन में कनखल पुलिस, सीआईयू हरिद्वार और एएचटीयू की संयुक्त टीमों ने अहम भूमिका निभाई। पुलिस की इस कार्रवाई की पूरे जनपद में सराहना हो रही है।
“हर बीतता मिनट एक मां की उम्मीद को कमजोर कर रहा था, लेकिन हरिद्वार पुलिस ने 72 घंटे के भीतर न सिर्फ तीन साल की मासूम राधिका को सकुशल बरामद किया बल्कि अंतरराज्यीय बच्चा चोरी और मानव तस्करी के पूरे नेटवर्क को बेनकाब कर दिया।”