Metro Hospital Haridwar

ना आयुष्मान चला ना गोल्डन कार्ड से मिला ईलाज, स्वास्थ्य कर्मी ने खोली मेट्रो अस्पताल की पोल

विकास कुमार।
निजी अस्पताल कोरोना की आड में किस तरह मरीजों को ठगने का काम कर रहे हैं, इसका ताजा उदाहरण हरिद्वार के मेट्रो अस्पताल में देखने को मिला है। यहां स्वास्थ्य कर्मी जो फ्रंट लाइन वर्कर हैं उनको उनके गोल्डन कार्ड के जरिए भर्ती करने से मना कर दिया। कोरोना संक्रमित स्वास्थ्य कर्मी नीरज गुप्ता ने कैश जमा किया तो उन्हें भर्ती किया गया। यही नहीं भर्ती करने के बाद भी इलाज में लापरवाही बरती गई।
नीरज गुप्ता ने कई बार आग्रह करने के बाद भी जब इलाज नहीं मिल पाया तो उन्होंने अस्पताल से ही फेसबुक लाइव पर अपनी व्यथा बताई। जब जाकर सिस्टम की नींद टूटी और आनन—फानन में सीएमओ डा. शंभू नाथ झा ने अस्पताल प्रबंधन को सही से इलाज करने के आदेश दिए।
नीरज गुप्ता ने हमें बताया कि मुझे कहा गया कि अगर आप कैश जमा करेंगे तो आपको भर्ती किया जाएगा वरना नहीं। हालांकि मैंने 20 हजार रुपए जमा कर दिए लेकिन रात को दवा देने के बाद अगले दिन दोहपहर करीब तीन बजे तक मुझे कोई देखने नहीं आया। जबकि मुझे 104 तक फीवर था। बाद में जब मैंने लाइव आकर अपनी पीडा बताई तो इलाज मिल पाया। उन्होंने बताया कि थर्मीमीटर और पल्स ओक्सीमीटर भी मुझे घर से लाने के लिए बोला जा रहा है। ना मेरा आक्सीजन लेवल चैक किया जा रहा था। उन्होंने बताया कि जब एक स्वास्थ्यकर्मी के साथ ऐसा हो रहा है तो आम आदमी के साथ किस तरह का व्यवहार ये कर रहे होंगे।े

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हेल्थ पॉलिसी से भी नहीं मिला ईलाज
हेल्थ पॉलिसी से भी मेट्रो अस्पताल में इलाज नहीं मिल पा रहा है। वरिष्ठ पत्रकार अश्वनी अरोडा ने मीडिया के अधिकारिक ग्रुप जिसमें जिलाधिकारी और सीएमओ भी हैं में बताया कि एक पत्रकार साथी को मेट्रो अस्पताल ने आयुष्मान और बीमा पॉलिसी से भर्ती करने से मना कर दिया। कोरोना का इलाज इन सभी स्कीमों के बजाए कैश किया जा रहा है। अधिकतर निजी अस्पतालों का ये ही हाल है। लेकिन जिलाधिकारी सी रविशंकर की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया, जो बताता है कि सिस्टम किस हद तक लापरवाही बरत रहा है।

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