पिरान कलियर (हरिद्वार)
आस्था के विश्व प्रसिद्ध केंद्र दरगाह साबिर ए पाक (पिरान कलियर) की पवित्र भूमि को एक बार फिर से कानून-व्यवस्था के पूरी तरह ध्वस्त होने का दंश झेलना पड़ा है। बहराइच से परिवार के साथ आई एक 6 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ रैन बसेरे मे हुई हैवानियत ने पूरे क्षेत्र में बारूद जैसी स्थिति पैदा कर दी है। इस जघन्य और शर्मनाक वारदात के बाद कलियर के स्थानीय निवासियों और दूर-दराज से आने वाले जायरीनों में भारी आक्रोश उबल रहा है। अब सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल यह खड़ा हो रहा है—क्या रुड़की के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र सेठ इस खुले अपराध के अड्डे पर गर्जन करेंगे या फिर दरगाह प्रशासन की तरह ही नामी कार्रवाई करेंगे!
रैन बसेरा या अपराधियों की सुरक्षित शरणगाह?कलियर का रैन बसेरा और उसके आसपास फैला अवैध ढांचा अब अकीदतमंदों की सुविधा के लिए नहीं, बल्कि जघन्य अपराधों को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल हो रहा है। बिना किसी एंट्री-रजिस्टर, बिना किसी पहचान पत्र और बिना किसी जवाबदेही के कोई भी संदिग्ध रात के अंधेरे में आकर टिक जाता है।
नाम मात्र के लिए लगाए गए दरगाह कर्मी और पीआरडी (PRD) के जवान पूरी तरह मूकदर्शक बने बैठे हैं। उनकी मौजूदगी के बावजूद रैन बसेरे के आसपास: नशा तस्करों और सटोरियों का खुला साम्राज्य चल रहा है। बच्चा चोरी, मोटर साइकिल चोरी और आए दिन छीना-झपटी की घटनाएं आम बात बन चुकी हैं। आवारा लड़के-लड़कियों का जमावड़ा और जायरीन महिलाओं के साथ सरेआम छेड़छाड़ बदस्तूर जारी है। दरगाह प्रशासन का ढर्रा इतना लचर हो चुका है कि घटना घटने के कुछ दिन तक तो हड़कंप मचाया जाता है, लेकिन मामला ठंडा पड़ते ही पूरी व्यवस्था फिर से अपराधियों की गोद में जाकर बैठ जाती है।
पूर्व मे भी मोईन साबरी के नेतृत्व में सौंपा पत्र “रैन बसेरे पर तुरंत ठोको ताला!”घटना के बाद भड़के जनआक्रोश के बीच स्थानीय निवासी मोईन साबरी की अगुवाई में नगर पंचायत पिरान कलियर के प्रार्थीगणों ने दरगाह प्रशासन को चेतावनी पत्र सौंपकर दो-टूक मांगें रखी हैं: रैन बसेरे पर तुरंत ताला लगाया जाए: सामान्य दिनों में रैन बसेरे को पूरी तरह बंद कर उस पर ताला जड़ा जाए और चारों तरफ से अवैध कब्जों को मुक्त कराया जाए। इसे केवल सालाना उर्स और बड़े मेलों के दौरान ही खोला जाए ताकि यहाँ पल रहे अपराध का खात्मा हो सके।
2 दिन से अधिक रुकने पर पूर्ण पाबंदी: अवैध रूप से हफ़्तों से जमे लोगों को बाहर खदेड़ा जाए और ठहरने की अधिकतम सीमा सिर्फ 2 दिन तय हो। संदिग्धों और आवारा तत्वों पर सीधी कार्रवाई: परिसर में गुट बनाकर घूमने वाले युवकों, भीख माँगने वाले नाबालिगों और अनैतिक कार्यों में शामिल लोगों पर तत्काल कठोर मुकदमा दर्ज किया जाए। बाजार बंद करने का समय और अखाड़े की पुरानी परंपरा लागू हो: उर्स के अलावा आम दिनों में दरगाह बाजार के बंद होने का निश्चित समय तय हो और हाजिरी व्यवस्था को पूर्व दरगाह पैतियाने (अखाड़े) में लागू किया जाए ताकि खून-खराबे और विवादों को रोका जा सके।
अब परीक्षा की घड़ी: ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र सेठ के रुख पर टिकीं निगाहें स्थानीय जनता ने साफ कर दिया है कि खोखले दावों और कागजी जांचों का वक्त खत्म हो चुका है। अब गेंद रुड़की के ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र सेठ और दरगाह प्रशासन के पाले में है।क्या ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र सेठ कड़ा रुख अपनाते हुए रैन बसेरे को सील कराकर अवैध गतिविधियों के सिंडिकेट को ध्वस्त करेंगे?
या फिर कलियर की पवित्र धरती पर ऐसे ही मासूमों की आबरू से खिलवाड़ होता रहेगा? कलियर की जनता अब केवल कड़े फैसलों और जमीनी कार्रवाई का इंतजार कर रही है!