कांवड़ मेला–2026: नगर निगम की अनोखी पहल, घाटों पर छोड़े गए वस्त्र अब नहीं बनेंगे कचरा

News129 हरिद्वार।

कांवड़ मेला–2026 के दौरान हरिद्वार नगर निगम ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय एवं अनूठी पहल शुरू की है। अब गंगा स्नान के बाद श्रद्धालुओं और कांवड़ यात्रियों द्वारा घाटों पर छोड़े जाने वाले वस्त्र कचरे में नहीं जाएंगे, बल्कि उनका वैज्ञानिक तरीके से संग्रहण कर पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) किया जाएगा।

30 जुलाई 2026 से शुरू हुए इस विशेष अभियान में नेचर फाउंडेशन के सहयोग से घाटों पर त्यागे गए वस्त्रों को अलग-अलग एकत्र कर सराय स्थित एमआरएफ सेंटर भेजा जा रहा है। यहां उनका सुरक्षित भंडारण किया जाएगा और कांवड़ मेला समाप्त होने के बाद इनसे रीसाइकिल्ड कॉटन फाइबर तैयार किया जाएगा।20 प्रशिक्षित कर्मी संभाल रहे मोर्चानगर निगम ने इस अभियान के लिए 20 प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती की है।

मालवीय घाट, सुभाष घाट, नाई घाट, विष्णु घाट और सीसीआर घाट सहित प्रमुख स्नान घाटों पर विशेष व्हील्स वाले डस्टबिन रखे गए हैं। कर्मचारी श्रद्धालुओं द्वारा छोड़े गए वस्त्रों को एकत्र कर तिरछा पुल और सीसीआर चौक तक पहुंचाते हैं, जहां से ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से उन्हें एमआरएफ सेंटर भेजा जाता है।

अपशिष्ट नहीं, अब बनेगा उपयोगी संसा धननगर आयुक्त नंदन कुमार ने बताया कि हर वर्ष कांवड़ मेले के दौरान बड़ी मात्रा में पुराने वस्त्र घाटों पर छोड़ दिए जाते हैं, जिससे स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित होती है। इस बार नगर निगम ने इस समस्या का स्थायी समाधान निकालते हुए वस्त्रों के पुनर्चक्रण की व्यवस्था लागू की है। सराय स्थित एमआरएफ सेंटर में प्रत्येक ट्रॉली का वजन दर्ज किया जा रहा है और वस्त्रों को सुरक्षित तरीके से सुखाकर रीसाइक्लिंग के लिए तैयार किया जाएगा।

श्रद्धालुओं से सहयोग की अपीलनगर निगम ने श्रद्धालुओं और कांवड़ यात्रियों से अपील की है कि स्नान के बाद त्यागे गए वस्त्र निर्धारित डस्टबिन में ही डालें, ताकि यह अभियान सफल हो सके। निगम का मानना है कि जनसहभागिता और नेचर फाउंडेशन के सहयोग से कांवड़ मेला–2026 स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल बनेगा।