हरिद्वार के पीपीपी मोड़ स्थित एनपीपीएल (NPPL) महिला अस्पताल में प्रसव के दौरान 21 वर्षीय गर्भवती महिला रेनू दास की मौत के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। सोमवार देर रात हुई इस घटना में नवजात शिशु सुरक्षित है। परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की है।
परिजनों ने उठाए कई सवाल
परिजनों का आरोप है कि 29 अगस्त को अस्पताल में रेनू दास की रक्त जांच में हीमोग्लोबिन 11 ग्राम बताया गया था और उसी आधार पर उन्हें ऑपरेशन के लिए भर्ती कर लिया गया। उनका कहना है कि बाद में अचानक खून की व्यवस्था करने के लिए कहा गया। जब परिजन ब्लड बैंक पहुंचे तो वहां हीमोग्लोबिन करीब 5 ग्राम बताया गया। परिजनों ने सवाल उठाया है कि अस्पताल की जांच रिपोर्ट में कहीं गड़बड़ी तो हुई, जिसके चलते महिला की जान गई।
इलाज में लापरवाही का आरोप
परिजनों का आरोप है कि महिला की हालत बिगड़ने के बावजूद समय पर आईसीयू में भर्ती नहीं किया गया और इलाज के दौरान डॉक्टर एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालते रहे। उनका कहना है कि स्थिति गंभीर होने पर अस्पताल ने वेंटिलेटर युक्त एंबुलेंस की व्यवस्था करने के लिए भी परिजनों से कहा।
बिना बेड की पुष्टि किए एम्स रेफर करने का आरोप
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में आईसीयू और डॉक्टर उपलब्ध होने के बावजूद मरीज का इलाज जारी रखने के बजाय उसे एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया गया। उनका कहना है कि एम्स में बेड की उपलब्धता की पुष्टि भी नहीं की गई थी। आरोप है कि जब परिजनों ने एम्स में भर्ती न होने की आशंका जताई तो उन्हें देहरादून जाने की सलाह दी गई और एंबुलेंस का खर्च भी खुद उठाने को कहा गया।
अस्पताल प्रबंधन का पक्ष
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मरीज की हालत अचानक गंभीर हो गई थी, इसलिए बेहतर उपचार के लिए उसे एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया। प्रबंधन के अनुसार महिला की मौत अस्पताल से रेफर किए जाने के दौरान रास्ते में हुई।
स्वास्थ्य विभाग से स्वतः संज्ञान लेने की मांग
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने अस्पताल के बाहर प्रदर्शन कर पूरे मामले की जांच की मांग की। परिजनों का कहना है कि अस्पताल का पर्यवेक्षण स्वास्थ्य विभाग करता है, इसलिए विभाग को मामले का स्वतः संज्ञान लेकर जांच शुरू करनी चाहिए। वहीं स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अभी तक इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।