Akums Drugs केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की जुलाई 2026 की NSQ (Not of Standard Quality) रिपोर्ट ने फार्मा सेक्टर में हलचल बढ़ा दी है। जुलाई महीने में देशभर में जांचे गए दवा सैंपलों में 280 सैंपल निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें केंद्रीय प्रयोगशालाओं में जांचे गए 40 और राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में जांचे गए 240 सैंपल शामिल हैं।
रिपोर्ट में कई सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाली दवाओं और इंजेक्शन के सैंपल गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाए गए हैं। इनमें पैरासिटामोल, टेल्मीसार्टन, मेट्रोनिडाजोल, ऑक्सीटोसिन और अन्य दवाओं के बैच शामिल हैं। दवा बनाने वाले प्रमुख कंपनी एकम्स ड्रग्स का नाम इस बार फिर सूची में आया है। इसकी दो दवाएं सैंपल में फेल हुई हैं। एकम्स के साथ ही हरिद्वार की 11 अन्य कंपनियों की दवाईयां भी सैंपल में खरी नहीं उतर पाई है।

हरिद्वार की दवा कंपनियों के उत्पाद भी NSQ सूची में
जुलाई की रिपोर्ट में हरिद्वार और रुड़की क्षेत्र में निर्मित कुछ दवाओं के बैच भी NSQ घोषित किए गए हैं। इनमें Medicamen Biotech का Telmisartan 20 mg, Rivpra Formulation का Sodium Bicarbonate 1000 mg और Malik Lifesciences का Amoxycillin-Cloxacillin शामिल है। वहीं रुड़की की Cotec Healthcare द्वारा निर्मित Paracetamol 500 mg का एक बैच भी गुणवत्ता परीक्षण में फेल बताया गया है। एकम्स ड्रग्स की Levocetirizine & Montelukast Sodium Dispersible tablets और Pantoprazole Tablets IP भी शामिल हैं।


NSQ का मतलब क्या है?
किसी दवा के NSQ घोषित होने का मतलब यह है कि उस विशेष बैच का सरकारी प्रयोगशाला परीक्षण निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। इसका अर्थ यह नहीं है कि संबंधित कंपनी की सभी दवाएं या सभी बैच खराब हैं।
दवा नियामक की रिपोर्ट सामने आने के बाद संबंधित बैचों पर नियामकीय कार्रवाई और बाजार से उनकी उपलब्धता की समीक्षा की जाती है। दवा कंपनियों और नियामक एजेंसियों की जिम्मेदारी होती है कि मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले बैचों की आपूर्ति और बिक्री को लेकर आवश्यक कदम उठाए जाएं।