News129:-धनौरी।
धनौरी वन बीट क्षेत्र में बेशकीमती खैर के पेड़ के अवैध कटान के मामले में वन विभाग की कार्रवाई एक माह बाद भी गिरफ्तारी तक नहीं पहुंच सकी है। कांवड़ पटरी पर बिजलीघर से आगे काटे गए खैर के पेड़ की कीमत करीब एक लाख रुपये बताई गई थी। देर रात पेड़ काटते समय आहट होने पर कथित वन तस्कर कटे पेड़ को मौके पर छोड़कर फरार हो गए थे। सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर लकड़ी को कब्जे में लिया था।
मामले में अब वन विभाग के एसडीओ जवाला प्रसाद का कहना है कि वन तस्करों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है और उनकी गिरफ्तारी के लिए धरपकड़ के प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन मामला सामने आए करीब एक माह का समय होने को है और अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब वन विभाग ने मुकदमा दर्ज कर लिया है और आरोपियों की पहचान भी सामने आ चुकी है, तो आखिर गिरफ्तारी में इतनी देरी क्यों हो रही है? क्या वन तस्कर गिरफ्त से बाहर हैं या उनकी गिरफ्तारी को लेकर विभागीय कार्रवाई धीमी है?
बताया जा रहा है कि धनौरी वन बीट क्षेत्र में इससे पहले भी शीशम, सागौन और खैर जैसे बेशकीमती पेड़ों के कटान के मामले सामने आते रहे हैं। खास बात यह है कि कटान वाले क्षेत्र के आसपास वन विभाग का ड्यूटी प्वाइंट भी मौजूद है। इसके बावजूद रात के समय पेड़ों पर आरी चलने से वन विभाग की रात्रि गश्त और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अब देखने वाली बात यह है कि मुकदमा दर्ज होने के करीब एक माह बाद वन विभाग आरोपियों को कब तक गिरफ्तार करता है और जंगल में लगातार हो रहे अवैध कटान पर प्रभावी रोक कब लगती है।