112 पर कॉल के बाद भी महिला तीमारदारों को नहीं मिला न्याय, मौके पर पहुंची पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप
महिला कर्मचारी की तहरीर पर दर्ज हो चुका है मुकदमा, नगर कोतवाली का हिस्ट्रीशीटर है आरोपी; अप्रैल से NPPL में सुपरवाइजर के पद पर कर रहा था काम
NPPL में हिस्ट्रीशीटर की नियुक्ति और कथित पैसों के लेनदेन को लेकर उठे सवाल, सामाजिक कार्यकर्ताओं ने PPP मोड पर अस्पताल संचालन की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की
हरिद्वार। महिला अस्पताल एक बार फिर गंभीर विवादों के घेरे में है। अस्पताल में PPP मोड पर स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन कर रही NPPL कंपनी में सुपरवाइजर के पद पर काम करने वाले विक्की गुप्ता उर्फ बादशाह पर महिला कर्मचारी और महिला तीमारदारों के साथ छेड़छाड़ करने के आरोपों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि महिला अस्पताल में महिलाओं की सुरक्षा से खिलवाड़ के आरोपों का सामना कर रहे आरोपी की गिरफ्तारी आखिर कब होगी?
जानकारी के अनुसार, विक्की गुप्ता उर्फ बादशाह अप्रैल माह से NPPL में सुपरवाइजर के तौर पर काम कर रहा था। आरोप है कि अस्पताल में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी के साथ उसके व्यवहार को लेकर विवाद हुआ था। इस मामले में महिला कर्मचारी की ओर से पुलिस को तहरीर दी गई, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया। बताया जा रहा है कि आरोपी विक्की गुप्ता नगर कोतवाली का हिस्ट्रीशीटर भी है।
मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि महिला तीमारदारों ने भी कथित छेड़छाड़ और अभद्र व्यवहार से परेशान होकर पुलिस हेल्पलाइन 112 पर कॉल की थी। सूचना मिलने पर पुलिस अस्पताल पहुंची, लेकिन आरोप है कि मौके पर तत्काल कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। सवाल यह है कि जब महिला अस्पताल में ही महिलाएं सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही थीं और पुलिस को भी सूचना दी गई थी, तो उस समय कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
अब इस पूरे प्रकरण में NPPL कंपनी की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आखिर एक ऐसे व्यक्ति को अस्पताल में सुपरवाइजर की जिम्मेदारी कैसे दी गई, जिसके बारे में हिस्ट्रीशीटर होने की बात सामने आ रही है? क्या नियुक्ति से पहले उसका पुलिस सत्यापन कराया गया था? क्या कंपनी को उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी थी? इसके अलावा NPPL और विक्की गुप्ता के बीच कथित आर्थिक लेनदेन या निवेश को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी किसी ठोस तथ्य या आधिकारिक पुष्टि का सामने आना बाकी है।
लगातार विवादों में घिरी NPPL कंपनी को लेकर अब सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी मोर्चा खोलने की तैयारी की है। उन्होंने महिला अस्पताल को PPP मोड पर NPPL के हवाले किए जाने की पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि अस्पताल का उद्देश्य मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है, न कि ऐसी घटनाओं को लेकर सुर्खियों में रहना। साथ ही उन्होंने NPPL में किन किन लोगों का पैसा लगा है। इसकी जांच की मांग की है।
फिलहाल पूरे मामले में सबसे अहम सवाल आरोपी की गिरफ्तारी और पुलिस जांच की प्रगति को लेकर है। महिला कर्मचारी की शिकायत पर मुकदमा दर्ज होने के बावजूद गिरफ्तारी नहीं होने से पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने में देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अब देखना होगा कि पुलिस आरोपी विक्की गुप्ता उर्फ बादशाह को कब गिरफ्तार करती है और NPPL प्रबंधन इस पूरे मामले में अपनी जिम्मेदारी को लेकर क्या जवाब देता है।