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कलियर/रुड़की। बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने और उन्हें अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से हरिद्वार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एवं पुलिस विभाग की ओर से सुरक्षित बचपन अभियान के तहत व्यापक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
बुधवार को इमलीखेड़ा, कलियर, धनौरी और माजरी स्थित विद्यालयों में न्यायिक अधिकारियों और पुलिस टीमों ने छात्र-छात्राओं को बाल संरक्षण, पॉक्सो एक्ट तथा शारीरिक एवं मानसिक शोषण से बचाव के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी।कलियर स्थित एमजीएफएम इंटर कॉलेज में प्रथम अपर जिला जज रुड़की अम्बिका पंत की उपस्थिति में कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस दौरान प्रभारी निरीक्षक कलियर कमल मोहन भंडारी, वरिष्ठ उपनिरीक्षक रमेश कुमार सैनी सहित अन्य अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं को बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनों और अधिकारों के बारे में जानकारी दी। अधिकारियों ने बच्चों को किसी भी प्रकार के शोषण, उत्पीड़न अथवा असुरक्षित स्थिति का सामना करने पर चुप रहने के बजाय भरोसेमंद व्यक्ति, अभिभावक या संबंधित अधिकारियों को जानकारी देने के लिए प्रेरित किया।
इसी क्रम में राजाबाबू इंटर कॉलेज, आसफनगर धनौरी में एसीजेएम हरिद्वार एवं उपनिरीक्षक महिपाल सैनी, माजरी इंटर कॉलेज में एसीजेएम द्वितीय रुड़की विपिन जी एवं अपर उपनिरीक्षक सूरज नेगी तथा राजकीय इंटर कॉलेज इमलीखेड़ा में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम रुड़की दीप्ति पंत एवं उपनिरीक्षक योगेश कुमार की उपस्थिति में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कार्यशालाओं में बाल अधिकारों, पॉक्सो (POCSO) एक्ट के प्रावधानों तथा बच्चों को सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया। छात्र-छात्राओं को समझाया गया कि किसी भी प्रकार के अनुचित व्यवहार या शोषण की स्थिति में समय रहते जानकारी देना जरूरी है। साथ ही उन्हें कानूनी सहायता प्राप्त करने के तरीकों से भी अवगत कराया गया।
अभियान के दौरान न्यायिक अधिकारियों और पुलिस विभाग के बीच समन्वय देखने को मिला। कार्यक्रमों में छात्र-छात्राओं को अपनी शंकाएं रखने और अधिकारियों से सीधे संवाद कर कानूनी प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिला। विद्यालय प्रबंधन और विद्यार्थियों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों को जागरूक बनाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
सुरक्षित बचपन अभियान का उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना, शोषण के विरुद्ध आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित करना और समाज में बाल संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है।