News 129:-पिरान कलियर।
758वें सालाना उर्स मेले में देशभर से हजारों जायरीनों के पहुंचने के बीच खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और साफ-सफाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मंगलवार को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट रुड़की एवं मेला अधिकारी दीपक रामचंद्र सेठ के औचक निरीक्षण में एक होटल की रसोई में कढ़ाई के अंदर काला और खराब तेल इस्तेमाल होता मिला।
जेएम ने नाराजगी जताते हुए मौके पर ही तेल नष्ट कराया और होटल संचालक पर जुर्माना लगाया।जेएम की इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल खाद्य सुरक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। उर्स मेले में बड़ी संख्या में होटल, ढाबे और खाद्य प्रतिष्ठान संचालित हो रहे हैं और रोजाना हजारों जायरीन इन स्थानों पर भोजन कर रहे हैं।
ऐसे में खाद्य सामग्री, इस्तेमाल होने वाले तेल, पानी, साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा मानकों की नियमित जांच करना संबंधित विभाग की अहम जिम्मेदारी है।जेएम की कार्रवाई के बाद सवाल—खाद्य विभाग की टीम कहां थी?मेले में खाद्य सुरक्षा को लेकर प्रशासनिक स्तर पर लगातार व्यवस्थाओं की निगरानी की जा रही है, लेकिन जेएम के अचानक निरीक्षण में ही होटल में खराब तेल का इस्तेमाल सामने आना विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े करता है।
सवाल यह भी है कि यदि जिम्मेदार विभाग नियमित रूप से होटल और ढाबों की जांच कर रहा था तो खराब और काला तेल इस्तेमाल होने की स्थिति पहले ही क्यों नहीं पकड़ी गई?जेएम दीपक रामचंद्र सेठ ने निरीक्षण के दौरान होटल संचालक को खाद्य सामग्री तैयार करते समय गुणवत्ता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने के सख्त निर्देश दिए। कार्रवाई के बाद मेले में खाद्य सामग्री बेचने वाले होटल-ढाबा संचालकों में भी खलबली मच गई।
बारिश के मौसम में बढ़ा खतरा उर्स मेले के दौरान लगातार बारिश और नमी के चलते खाद्य पदार्थों के खराब होने का खतरा और बढ़ जाता है। ऐसे में खुले में रखे खाद्य पदार्थ, दूषित पानी, पुराने तेल और साफ-सफाई में लापरवाही जायरीनों की सेहत पर भारी पड़ सकती है। यही वजह है कि मेले में खाद्य सुरक्षा विभाग की सक्रिय और नियमित निगरानी बेहद जरूरी मानी जा रही है।
जायरीनों की मांग—लगातार चले जांच अभियानजेएम की कार्रवाई के बाद जायरीनों और स्थानीय लोगों ने मांग उठाई है कि खाद्य सुरक्षा विभाग केवल औपचारिक निरीक्षण तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे उर्स मेले में होटल, ढाबों और खाद्य स्टॉलों की नियमित जांच करे। इस्तेमाल होने वाले तेल, खाद्य सामग्री और पानी के नमूने लिए जाएं तथा साफ-सफाई की व्यवस्था भी जांची जाए, ताकि दूर-दराज से आने वाले जायरीनों की सेहत के साथ किसी तरह का खिलवाड़ न हो।
अब देखना यह है कि जेएम के औचक निरीक्षण के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग कब तक सक्रिय होता है और उर्स मेले में खाद्य प्रतिष्ठानों की नियमित जांच के लिए क्या ठोस कार्रवाई की जाती है।