दरगाह कर्मियों के ‘सिंडिकेट’ का पर्दाफाश: मो. रफी को बदनाम करने की साजिश, खुद भ्रष्टाचार में डूबे कर्मचारी उठा रहे उंगली

एनएसजी न्यूज:-​कलियर शरीफ: आस्था के केंद्र दरगाह साबिर पाक में इन दिनों खिदमतगारों और भ्रष्ट कर्मचारियों के बीच शीतयुद्ध छिड़ा हुआ है। दरगाह की नि:स्वार्थ सेवा (खिदमत) में जुटे मो. रफी के खिलाफ सोशल मीडिया पर प्रायोजित तरीके से खबर चलवाकर उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि आरोप वो लोग लगा रहे हैं, जो खुद भ्रष्टाचार, गबन और उगाही के मामलों में कई बार दरगाह से बर्खास्त हो चुके हैं।​

भ्रष्टाचार के ‘खिलाड़ियों’ को नहीं पच रही खिदमत​-,सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार, मो. रफी अपने गुरु स्वर्गीय मुन्ने बाबा की परंपरा का निर्वहन करते हुए वर्षों से दरगाह में नि:शुल्क खिदमत कर रहे हैं। लेकिन यह नि:स्वार्थ सेवा उन कर्मियों को चुभ रही है, जिन्होंने दरगाह को ‘सेटिंग’ और ‘उगाही’ का अड्डा बना लिया है। आरोप है कि ये भ्रष्ट कर्मी अपनी काली करतूतों को छिपाने के लिए प्रशासन को गुमराह कर रहे हैं और मो. रफी की नियुक्ति में रोड़े अटका रहे हैं।​

सिदरी पर कब्जा और अवैध उगाही का सच​-खबरों में अवैध कब्जे और बिजली चोरी का राग अलापने वाले खुद घेरे में हैं। दरगाह परिसर में हकीकत यह है कि:​अधिकतर सिदरियों पर अवैध कब्जा उन्हीं लोगों का है जो खुद को हितैषी बताते हैं।​जायरीनों से अवैध वसूली और गुमराह करने का खेल लंबे समय से चल रहा है।​कई कर्मचारी बाहरी हैं और उनकी संदिग्ध भूमिका की कभी निष्पक्ष जांच नहीं हुई।​बर्खास्त होकर फिर बहाल होने का ‘चमत्कार’​सबसे बड़ा सवाल दरगाह प्रशासन की कार्यप्रणाली पर है। जो कर्मचारी गबन और चोरी के मामलों में हटाए गए थे, वे आखिर किसके संरक्षण में दोबारा बहाल हो जाते हैं? यह ‘साठ-गांठ’ का खेल ही दरगाह की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है। मो. रफी पर उंगली उठाने वाले इन सफेदपोश कर्मियों के खिलाफ अब जांच की मांग तेज हो गई है।​

निष्पक्ष जांच से खुलेगा ‘सिस्टम की सेंध’ का राज​मो. रफी के समर्थकों का कहना है कि वे किसी भी जांच के लिए तैयार हैं, बशर्ते जांच उन लोगों की भी हो जो दरगाह की संपत्ति पर कुंडली मारकर बैठे हैं और बाहर भी अवैध कब्जे कर रखे हैं। सोशल मीडिया पर कथित पत्रकारों के माध्यम से छवि खराब करने वालों के खिलाफ अब मानहानि और कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।​”ये वो लोग हैं जो खुद कांच के घरों में रहते हैं और दूसरों पर पत्थर फेंक रहे हैं। दरगाह में चोरी और गबन करने वाले आज नैतिकता का पाठ पढ़ा रहे हैं, जिसे जनता और प्रशासन अच्छी तरह समझता है।”​​उन कर्मचारियों की सूची सार्वजनिक करने की मांग करें जिन पर गबन के मुकदमे हैं।​दरगाह के बाहर अवैध संपत्ति बनाने वाले कर्मियों की आय की जांच की मांग करें।​’बाहरी’ बनाम ‘स्थानीय खिदमतगार’ का मुद्दा मजबूती से उठाएं।ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक राम चंद्र सेठ के इस सख्त रुख के बाद दरगाह के भ्रष्ट गलियारों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन अब उन फाइलों को दोबारा खंगाल रहा है जिनमें कर्मियों की बर्खास्तगी और फिर संदिग्ध बहाली के राज दफन हैं। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि अब दूध का दूध और पानी का पानी होगा और दरगाह की सेवा में लगे सच्चे खिदमतगारों को न्याय मिलेगा।