कलियर दरगाह में ‘चोरों’ की मौज: भ्रष्टाचार में बर्खास्त कर्मियों की पिछली गली से बहाली, आखिर किसका है संरक्षण

​पिरान कलियर:पवित्र आस्ता पर ‘दीमकों’ का हमला: चोरी के आरोपियों को दोबारा ड्यूटी का इनाम, ईमानदार सेवादारों के खिलाफ रची जा रही साजिश!*

विश्व प्रसिद्ध दरगाह पिरान कलियर इन दिनों इबादत से ज्यादा भ्रष्टाचार के सिंडिकेट को लेकर चर्चा में है। दरगाह प्रशासन के भीतर बैठे कुछ ‘सफेदपोश’ भ्रष्ट कर्मचारियों ने आस्था की इस पवित्र जगह को अपनी निजी जागीर बना लिया है। सबसे हैरान करने वाला खुलासा यह है कि जिन कर्मचारियों को चोरी और गबन के गंभीर आरोपों में दरगाह से दूध में से मक्खी की तरह निकाल फेंका गया था, वे आज फिर से दरगाह के रजिस्टर में अपनी हाजिरी भर रहे हैं। आखिर प्रशासन की नाक के नीचे ‘चोरों की यह बहाली’ किसके इशारे पर हो रही है?

​भ्रष्टाचार का ‘अजब खेल’: हटाये गए, फिर चुपचाप बहाल किए गए!​दरगाह के गलियारों में चर्चा है कि यहाँ नियम-कानून नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का सिक्का चलता है।​चोरी के आरोपी फिर ड्यूटी पर: कई ऐसे कर्मचारी हैं जिन्हें दरगाह की संपत्ति और जायरीनों के पैसे पर हाथ साफ करते हुए पकड़ा गया था। इन्हें पद से हटाया गया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद बिना किसी जांच या स्पष्टीकरण के उन्हें दोबारा बहाल कर दिया गया।​

3 महीने पहले का ड्रामा: महज तीन महीने पहले भ्रष्टाचार के मामले में जिन चेहरों को बाहर का रास्ता दिखाया गया था, आज वे बाकायदा ड्यूटी कर रहे हैं। क्या दरगाह की व्यवस्था अब इन दागी हाथों में सुरक्षित है?​

साजिश का ‘सोशल मीडिया’ कनेक्शन: ईमानदार लोगों को फंसाने का जाल​दरगाह में पिछले 10-15 सालों से कुंडली मारकर बैठे कुछ बाहरी कर्मचारी अब एक खूंखार गिरोह की तरह काम कर रहे हैं। इनका काम केवल भ्रष्टाचार करना ही नहीं, बल्कि दरगाह की सेवा करने वाले ईमानदार लोगों का रास्ता रोकना भी है।

आरोप है कि यह भ्रष्ट लॉबी कुछ तथाकथित पत्रकारों के जरिए सोशल मीडिया पर झूठी और भ्रामक खबरें चलवा रही है। एक खास व्यक्ति को टारगेट किया जा रहा है ताकि उसकी छवि खराब की जा सके और ये भ्रष्ट लोग अपनी लूट जारी रख सकें। सवाल यह है कि प्रशासन इन षड्यंत्रकारियों पर नकेल क्यों नहीं कस रहा?​सिधरियों पर ‘कथित सूफियों’ का अवैध कब्जा​अतिक्रमण हटाने का ढोंग करने वाले लोग खुद अवैध कब्जों के मास्टरमाइंड हैं। दरगाह साबिर पाक के परिसर में मौजूद कीमती सिधरियों पर कुछ तथाकथित सूफियों ने अपने निजी स्वार्थ के लिए कब्जा जमा रखा है। यह अवैध कब्जे दरगाह की सुंदरता और व्यवस्था पर बदनुमा दाग हैं। प्रशासन को चाहिए कि इन कब्जों पर तुरंत बुलडोजर चलाए।

​प्रशासन से सीधा सवाल: कब जागेगा सिस्टम?​हम ज्वाइंट मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र सेठ और तहसीलदार/दरगाह प्रबंधक विकास अवस्थी से न्याय की उम्मीद करते हैं। क्षेत्र की जनता जानना चाहती है कि:​दागी कर्मियों की वापसी क्यों? चोरी के आरोपियों को दोबारा नौकरी पर रखने की अनुमति किसने दी?​बाहरी सिंडिकेट पर कार्रवाई कब? 15 साल से जमे हुए उन कर्मियों का हिसाब कब होगा जो बाहरी होकर स्थानीय व्यवस्था को चुनौती दे रहे हैं?

​झूठे प्रोपेगेंडा पर रोक: सोशल मीडिया के जरिए दरगाह को बदनाम करने वाले और निजी रंजिश निकालने वाले कर्मचारियों की पहचान कर उन पर FIR दर्ज क्यों नहीं की जा रही?​साफ चेतावनी: अगर दरगाह के भीतर से इन भ्रष्ट दीमकों को नहीं निकाला गया, तो आस्था के इस केंद्र की साख पूरी तरह खत्म हो जाएगी। प्रशासन को अब आर-पार की कार्रवाई करनी ही होगी!