नशीली चाय पिलाई और फिर दिया जहर का इंजेक्शन, कंकाल बरामद
बागपत। उत्तर प्रदेश के बागपत में 25 जुलाई से लापता चल रहे दो युवकों की तलाश का मामला सनसनीखेज डबल मर्डर में बदल गया है। सिंगौली तगा गांव निवासी दिव्यांग अंकित प्रजापति (28) और उसके दोस्त इसरार (30) के शव लहचौड़ा गांव स्थित श्रीगणेश मंदिर परिसर में करीब चार फीट गहरे गड्ढे से बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, दोनों को कथित तौर पर नशीली गोलियां देकर बेहोश किया गया और इसके बाद जहर का इंजेक्शन लगाने के बाद मंदिर परिसर में जिंदा दफन कर दिया गया।
इस वारदात का आरोप मंदिर के साधु नरेशनाथ, उसके दो शिष्यों और एक नाबालिग पर लगाया गया है। पुलिस ने साधु के एक शिष्य उज्ज्वल निवासी पूरनपुर नवादा को गिरफ्तार कर लिया है। दूसरे आरोपी कृष्णा यादव निवासी धुम्मा भुलंदी, जिला जौनपुर को भी गिरफ्तार किया गया है। वहीं मुख्य आरोपी साधु नरेशनाथ और घटना में शामिल बताए जा रहे नाबालिग की तलाश में पुलिस की तीन टीमें लगाई गई हैं।
मोबाइल लोकेशन ने खोला मंदिर का राज
अंकित और इसरार 25 जुलाई को बाइक से रटौल घूमने की बात कहकर घर से निकले थे। जब दोनों वापस नहीं लौटे तो परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। अंकित की बहन भावना ने 27 जुलाई को चांदीनगर थाने में दोनों के लापता होने की तहरीर दी। पुलिस ने 29 जुलाई को गुमशुदगी दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने दोनों के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लोकेशन खंगाली। मोबाइल की लोकेशन लहचौड़ा स्थित श्रीगणेश मंदिर परिसर के आसपास मिलने के बाद पुलिस का शक मंदिर और वहां रहने वाले साधु तथा उसके साथियों पर गया।

शिष्य की गिरफ्तारी के बाद सामने आई पूरी कहानी
पुलिस ने साधु के शिष्य उज्ज्वल को बुधवार देर शाम मंदिर के पास से हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में उज्ज्वल ने वारदात की पूरी कहानी बताई।
पुलिस के अनुसार , अंकित के परिवार की एक लड़की से साधु नरेशनाथ के कथित अनैतिक संबंध थे। अंकित को इसकी जानकारी हुई तो उसने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। इसी रंजिश को पुलिस हत्या की एक प्रमुख वजह मानकर जांच कर रही है।
25 जुलाई को अंकित अपने दोस्त इसरार के साथ बाइक से मंदिर पहुंचा था। वहां साधु नहीं मिला तो दोनों वहां से जाने लगे। आरोप है कि कुछ देर बाद साधु मंदिर पहुंचा और फोन करके दोनों को वापस मंदिर परिसर में बुला लिया।
चाय में नशीली गोलियां मिलाने का आरोप
पुलिस के मुताबिक, उस समय मंदिर परिसर में साधु नरेशनाथ के अलावा उसके शिष्य कृष्ण यादव और एक नाबालिग भी मौजूद था। आरोप है कि बातचीत के दौरान दोनों को चाय में नशीली गोलियां मिलाकर पिला दी गईं। चाय पीने के बाद दोनों बेहोश हो गए।
इसके बाद साधु ने कथित तौर पर दोनों को जहर के इंजेक्शन लगाए। आरोप है कि दोनों के बेहोश होने के बाद मंदिर परिसर में ही उन्हें दफनाने की साजिश रची गई।
पुलिस के अनुसार, इसके लिए लहचौड़ा गांव के एक युवक से फावड़ा मंगवाकर मंदिर परिसर में करीब चार फीट गहरा गड्ढा खोदा गया। इसके बाद दोनों को उसी गड्ढे में डालकर मिट्टी से ढक दिया गया।
शवों के ऊपर धूनी, 14 दिन तक पूजा करता रहा साधु
इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह सामने आया है कि जिस जगह दोनों युवकों के शव दफन थे, उसी के ऊपर साधु ने धूनी जमा ली।
पुलिस के मुताबिक, साधु करीब 14 दिन तक उसी स्थान पर बैठकर पूजा करता रहा, जबकि उसके नीचे दोनों युवकों के शव दबे हुए थे। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि वारदात के बाद आरोपियों ने सबूत मिटाने के लिए कई कदम उठाए।
इसरार की बाइक यमुना में और मोबाइल नहर में फेंका
पुलिस के अनुसार, इसरार की बाइक को मवीकलां-सांकरौद गांव के पास यमुना नदी में फेंक दिया गया। वहीं दोनों के मोबाइल फोन में से एक को पूर्वी यमुना नहर में फेंकने की बात सामने आई है।
पुलिस अब इन दोनों स्थानों पर भी सबूत तलाशने की कोशिश कर रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि वारदात में और कितने लोग शामिल थे।
चार फीट गहरे गड्ढे से निकाले गए शव
उज्ज्वल की निशानदेही पर पुलिस ने बृहस्पतिवार तड़के करीब ढाई बजे मंदिर परिसर में खुदाई शुरू कराई। करीब चार फीट गहरे गड्ढे से दोनों शव बरामद किए गए।
कई दिनों तक जमीन में दबे रहने के कारण शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो चुके थे। शरीर के कई हिस्सों में हड्डियां दिखाई देने लगी थीं। शवों की हालत को देखते हुए पुलिस ने पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के लिए विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है।
गाजियाबाद से फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम बुलाए जाने की बात कही गई है और शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराया जाना प्रस्तावित है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत की वास्तविक वजह और जहर के इस्तेमाल की पुष्टि में मदद मिल सकती है।
दूसरे आरोपी कृष्ण यादव को भी गिरफ्तार किया
पुलिस ने मामले में दूसरे आरोपी कृष्ण यादव को उसके घर से गिरफ्तार किया। वह धुम्मा भुलंदी, जिला जौनपुर का रहने वाला बताया गया है। गिरफ्तारी के बाद उसे बागपत लाया गया और देर रात तक उससे पूछताछ की गई।
पुलिस अब दोनों आरोपियों के बयानों का मिलान कर रही है और मुख्य आरोपी साधु नरेशनाथ की भूमिका से जुड़े साक्ष्यों को जुटा रही है।
साधु नरेशनाथ 8 अगस्त से फरार
पुलिस के मुताबिक, साधु नरेशनाथ 8 अगस्त को मंदिर से गायब हो गया था। पुलिस की तीन टीमें उसकी तलाश में लगाई गई हैं। उसके संभावित ठिकानों के साथ-साथ उसके संपर्क में रहने वाले लोगों से भी पूछताछ की जा रही है।
एक नाबालिग के भी वारदात में शामिल होने की बात सामने आई है। पुलिस उसकी तलाश भी कर रही है और मामले में उसकी भूमिका की जांच की जा रही है।
पुलिस ने साधु से दो बार पूछताछ की थी
इस पूरे मामले में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। एसपी सूरज कुमार राय के अनुसार, पुलिस ने साधु नरेशनाथ से दो बार पूछताछ की थी।
पुलिस के मुताबिक, उस दौरान अंकित की बहन और कुछ अन्य लोगों ने साधु को परिवार का सदस्य बताते हुए उसकी घटना में भूमिका नहीं होने की बात कही, जिसके बाद उसे छोड़ दिया गया। दोबारा थाने बुलाए जाने के बाद भी उसे छुड़वा लिया गया। इसके बाद साधु मंदिर से फरार हो गया।
अब पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि साधु के खिलाफ पहले से मिले इनपुट के बावजूद उसे क्यों छोड़ा गया और उस समय पुलिस के सामने क्या तथ्य रखे गए थे।
रंजिश, साजिश और हत्या की पूरी कड़ी की जांच
फिलहाल पुलिस की जांच में कथित तौर पर अनैतिक संबंधों का विरोध हत्या की वजह के रूप में सामने आया है, लेकिन पुलिस अन्य संभावित कारणों और आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों युवकों को जहर का इंजेक्शन किसने दिया, नशीली गोलियां कहां से आईं, फावड़ा किसने उपलब्ध कराया और हत्या के बाद दोनों की बाइक और मोबाइल को ठिकाने लगाने में कौन-कौन शामिल था।
इस सनसनीखेज डबल मर्डर ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। अब पोस्टमार्टम, फोरेंसिक जांच और आरोपियों से पूछताछ के बाद ही साफ हो सकेगा कि दोनों युवकों की मौत किस जहर से हुई और हत्या की पूरी साजिश में किस-किस की क्या भूमिका थी।