अतीक साबरी:-
पिरान कलियर। विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत मखदूम अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक में इन दिनों आस्था के नाम पर लूट का खुला खेल चल रहा है। दरगाह की गरिमा को ताक पर रखकर फर्जी खादिमों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि जायरीनों द्वारा दानपात्रों में डाली जा रही रकम सुरक्षित नहीं है। सबसे गंभीर सवाल दरगाह की सुरक्षा में तैनात पीआरडी (प्रांतीय रक्षक दल) के जवानों और दरगाह कर्मचारियों पर उठ रहे हैं, जिनकी मौजूदगी में यह संगठित लूट अंजाम दी जा रही है।
साठगांठ का खेल: ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की चुप्पी पर सवाल
ईद-उल-फितर के बाद से ही दरगाह में जायरीनों का भारी हुजूम उमड़ रहा है। जैसे-जैसे भीड़ बढ़ रही है, वैसे-वैसे फर्जी खादिमों का गिरोह और अधिक सक्रिय हो गया है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह गिरोह समूह बनाकर दानपात्रों के इर्द-गिर्द खड़ा हो जाता है और चालाकी से चढ़ावे की रकम साफ कर देता है। चौंकाने वाली बात यह है कि जहाँ ये वारदातें हो रही हैं, वहां चंद कदमों की दूरी पर पीआरडी जवान और दरगाह के वेतनभोगी कर्मचारी तैनात रहते हैं। इन कर्मियों की रहस्यमयी चुप्पी और कार्रवाई न करने की मंशा चीख-चीखकर मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है। स्थानीय चर्चाओं की मानें तो इस ‘लूट’ का एक हिस्सा कथित तौर पर सुरक्षा तंत्र के कुछ कड़ियों तक भी पहुंच रहा है, जिसके चलते इन फर्जी तत्वों के हौसले बुलंद हैं।
प्रबंधन की ढिलाई और बढ़ता भ्रष्टाचार जब से तहसीलदार ने दरगाह प्रबंधक का अतिरिक्त कार्यभार संभाला है, तब से दरगाह की आंतरिक व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरती नजर आ रही है। फर्जी खादिमों ने दरगाह परिसर को अपनी जागीर बना लिया है। नौचंदी जुमेरात जैसे बड़े मौकों पर तो स्थिति और भी भयावह हो जाती है।
जायरीनों का आरोप है कि ये फर्जी खादिम न केवल दान पर डाका डाल रहे हैं, बल्कि दुआ के नाम पर भी लोगों को गुमराह कर अवैध वसूली कर रहे हैं। सुरक्षा में तैनात जवान मूकदर्शक बने यह सब देख रहे हैं, जिससे प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लग गया है।
जांच और कार्रवाई की मांग स्थानीय निवासियों और जागरूक समाजसेवियों ने इस मामले में उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि दरगाह परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों और ड्यूटी चार्ट की गहनता से जांच की जाए, तो पीआरडी जवानों और कर्मचारियों की संलिप्तता उजागर हो सकती है।
आस्था के इस केंद्र पर चल रहे इस ‘गोरखधंधे’ ने दरगाह की छवि को धूमिल कर दिया है। अब देखना यह होगा कि वक्फ बोर्ड और जिला प्रशासन इन ‘वर्दीधारी’ मददगारों और फर्जी खादिमों पर कब हंटर चलाता है।