अतीक साबरी:-पिरान कलियर (रुड़की): विश्व प्रसिद्ध दरगाह अलाउद्दीन अली अहमद साबिर पाक में ईद के बाद जायरीनों का सैलाब उमड़ रहा है। अकीदत और इबादत के इस माहौल के बीच एक ऐसा ‘ठग गिरोह’ सक्रिय हो गया है, जो मजहब की आड़ में भोले-भाले जायरीनों की जेब पर डाका डाल रहा है।
डराकर ‘अर्जी’ और नाम पर ‘वसूली’दरगाह के बुलंद दरवाजे और सीढ़ियों पर कब्जा जमाए ये कथित फर्जी सूफी, बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को अपना निशाना बना रहे हैं।
इनका तरीका बेहद शातिराना है:खौफ का कारोबार: जायरीनों को भूत-प्रेत, काला जादू और जिन्नात का डर दिखाकर मानसिक रूप से डराया जाता है।
दो शब्दों की कीमत हजारों: एक सादे कागज पर दो शब्द की ‘अर्जी’ लिखने के नाम पर इन जायरीनों से हजारों रुपये ऐंठ लिए जाते हैं।
ठिया लगाकर कब्जा: दरगाह परिसर के मुख्य रास्तों पर इन फर्जी बाबाओं ने अपने अवैध ठिकाने बना लिए हैं, जिससे जायरीनों को आने-जाने में भी दिक्कत हो रही है।
प्रशासन हुआ सख्त: जॉइंट मजिस्ट्रेट की चेतावनीलंबे समय से चल रहे इस खेल पर अब प्रशासन की नजर टेढ़ी हो गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए रुड़की जॉइंट मजिस्ट्रेट दीपक चंद्र सेठ ने कड़ा रुख अपनाया है।”दरगाह क्षेत्र में फर्जी तरीके से जायरीनों को गुमराह करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे लोगों को चिन्हित किया जा रहा है और इनके खिलाफ अवैध उगाही व धोखाधड़ी की धाराओं में सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” — दीपक चंद्र सेठ,
जॉइंट मजिस्ट्रेटआस्था या अंधविश्वास?हैरानी की बात यह है कि यह सिलसिला काफी समय से बेखौफ चल रहा है। जायरीन अपनी मन्नतें लेकर दरगाह आते हैं, लेकिन ये ठग उनकी मजबूरी और आस्था का फायदा उठाकर उन्हें गुमराह कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद क्या दरगाह परिसर इन ‘सफेदपोश ठगों’ से मुक्त हो पाएगा?