डीएम साहब! पुत्रवधु के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भटक रही विकलांग महिला, महिला अस्पताल में हुई थी डिलीवरी, रेफर के दौरान मौत

डीएम साहब! पुत्रवधु के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भटक रही विकलांग महिला, महिला अस्पताल में हुई थी डिलीवरी के दौरान मौत

पीपीपी मोड में गए महिला अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के चलते पहले गर्भवती महिला रेणू दास को अपनी जान गंवानी पड़ी और रेणू दास की विकलांग सास पिछले डेढ़ महीने से पुत्रवधु के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए चक्कर काट रही है। आलम ये है कि एक ओर जहां निजी हाथों में गए महिला अस्पताल एनपीपीएल प्रबंधन विकलांग महिला को चक्कर पर चक्कर कटा रहा है वहीं दूसरी ओर हरिद्वार स्वास्थ्य विभाग चादर ताने गहरी निद्रा में सो रहा है।

एनपीपीएल की लापरवाही मृतक रेणू दास के परिवार पर आपदा से कम नहीं
ब्रह्मपुरी की रहने वाली रेणू दास को महिला अस्पताल एनपीपीएल में 31 अगस्त को भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि एनपीपीएल के डॉक्टरों ने उन्हें अंधेरे में रखा और रेणू दास से आपरेशन के बाद मिलने नहीं दिया गया। जबकि उन्हें ये बताया जाता रहा है कि उसकी तबीयत ठीक है। बाद में दो यूनिट ब्लड लाने के लिए बोला गया लेकिन प्रयोग करने से मना करते हुए ये बोला गया कि रेणू को वे​टिंलेटर पर रखा गया है उसकी जान बचाने के लिए हायर सेंटर भेजना जरुरी है।

डीएम साहब! पुत्रवधु के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भटक रही विकलांग महिला, महिला अस्पताल में हुई थी डिलीवरी के दौरान मौत
डीएम साहब! पुत्रवधु के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भटक रही विकलांग महिला, महिला अस्पताल में हुई थी डिलीवरी के दौरान मौत

बिना बैड की उपलब्धता पता किए कर दिया रैफर
रेणू दास की विकलांग सास सावित्री ने बताया कि आनन फानन में रेणू दास को निजी एंबुलेंस खुद एनपीपीएल ने ही कराकर हायर सेंटर रैफर कर दिया। जबकि रैफर से पहले महिला अस्पताल प्रबंधन से पूछा गया था कि यदि एम्स या दूसरे असप्ताल में आईसीयू नहीं मिला तो क्या होगा। लेकिन अपनी लापरवाही को छुपाने के लिए बिना बैड की उपलब्धता जाने ही रेणू को रैफर कर दिया गया और फिर आखिर वही हुआ जिसका डर था एम्स ने आईसीयू ना होने की बात कहकर चलता कर दिया और देहरादून जाने के बीच में एंबुलेंस चालक ने गाड़ी वापस मोड़ ली और बोला कि रेणू की मौत हो चुकी है।

एंबुलेंस चालक ने खुद ही कर दिया रेणू को मृत घोषित
परिजनों का आरोप है कि रेणू दास को देहरादून के किसी दूसरे अस्पताल ले जाने से पहले ही चालक ने कहा कि रेणू की मौत हो चुकी है। परेशान परिवार वापस हो लिया और रेणु को परिजन अंतिम संस्कार के लिए घर ले आए। जबकि नियमानुसार रेणू को या तो किसी दूसरे अस्पताल ले जाना चाहिए था या फिर वापस महिला अस्पताल एनपीपीएल लाया जाना चाहिए था। लेकिन दोनों में से कुछ काम नहीं किया गया। अब असपताल प्रबंधन की लापरवाही का खामियाजा रेणू दास की विकलांग सास भुगत रही है क्योंकि रेणू दास का मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है।

महिला अस्पताल

क्यों नहीं बन रहा मृत्यु प्रमाण पत्र
रेणू दास की सास सावित्री ने बताया कि महिला अस्पताल एनपीपीएल प्रबंधन ने पहले कहा कि एंबुलेंस चालक का आधार कार्ड और अन्य जानकारी लानी होगी तब प्रमाण पत्र बन जाएगा। लेकिन एंबुलेंस चालक जिसे खुद एनपीपीएल ने बुक किया था उसने कोई भी दस्तावेज देने से मना कर दिया। विकलांग सावित्री लगातार अस्पताल के चक्कर काट रही है। डेढ महीने से ज्यादा का समय हो गया लेकिन रेणू को ना तो इलाज के दौरान इंसाफ मिला और ना ही मरने के बाद उसके परिवार को इंसाफ मिल पा रहा है।

क्या कहता है कि एनपीपीएल प्रबंधन
एनपीपीएल के डायरेक्टर मनोज मिश्रा ने बताया कि रेणू दास को बचाने का पूरा प्रयास किया गया था। गंभीर हालत में उसे हायर सेंटर रैफर करना पड़ा। एंबुलेंस हमने ही कराई थी, रेणू दास की मौत हमारे अस्पताल में नहीं हुई। इसलिए हमारी जिम्मेदारी नहीं है। फिर ही हम प्रयास कर रहे है किसी तरह रेणू दास का मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाए।

डीएम साहब! पुत्रवधु के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भटक रही विकलांग महिला, महिला अस्पताल में हुई थी डिलीवरी के दौरान मौत
डीएम साहब! पुत्रवधु के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए भटक रही विकलांग महिला, महिला अस्पताल में हुई थी डिलीवरी के दौरान मौत