कलियर मे जश्न-ए-गौसुल आजम में उमड़ा अकीदतमंदों का हुजूम, दरबार-ए-साबरी में हुई चादरपोशी

पिरान कलियर। सूफियाना नगरी पिरान कलियर एक बार फिर रूहानी रंग में रंगी नजर आई। मौका था अंजुमन गुलामाने मुस्तफा सोसायटी की ओर से आयोजित जश्न-ए-गौसुल आजम (ग्यारहवीं शरीफ) का। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर अपनी अकीदत का इजहार किया। बरेली शरीफ की खानकाह-ए-शराफतिया सकलैनियां के गद्दीनशीन शाह गाजी मियां मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।कलियर पहुंचने पर शाह गाजी मियां का सूफी राशिद अली साबरी के नेतृत्व में अकीदतमंदों ने फूल मालाओं से गर्मजोशी से इस्तकबाल किया। इसके बाद साबरी कायनात पैलेस, दरगाह बाबा जिलानी से सूफी राशिद अली साबरी की अगुवाई में शाह गाजी मियां समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद जुलूस की शक्ल में दरबार-ए-साबरी पहुंचे।

दरबार-ए-साबरी में सूफी राशिद अली साबरी ने चादर पेश कर चादरपोशी की और अकीदत के फूल पेश किए। इसके बाद फातिहा ख्वानी हुई। इस मौके पर मुल्क में अमनो-सलामती, खुशहाली और आपसी भाईचारे के लिए विशेष दुआ कराई गई। दुआ के दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने मुल्क की तरक्की, अमन और खुशहाली के लिए दुआ की।सूफी राशिद अली साबरी ने कहा कि सूफियाना परंपरा हमेशा से मोहब्बत, इंसानियत, भाईचारे और खिदमत का संदेश देती आई है। बुजुर्गाने दीन की शिक्षाएं लोगों को आपसी सौहार्द कायम रखने और जरूरतमंदों की मदद करने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने अकीदतमंदों से मोहब्बत और भाईचारे के संदेश को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

अंजुमन गुलामाने मुस्तफा सोसायटी, कलियर इकाई के सदर हाजी गुलशाद सिद्दीकी ने कहा कि जश्न-ए-गौसुल आजम का आयोजन अकीदत के साथ-साथ समाज में मोहब्बत, भाईचारे और इंसानियत का संदेश देने का माध्यम है। उन्होंने आयोजन में सहयोग करने वाले सभी अकीदतमंदों का आभार जताया।खादिम मुनव्वर अली साबरी ने कहा कि बुजुर्गाने दीन की जिंदगी इंसानियत और खिदमत का बेहतरीन उदाहरण रही है।

जश्न-ए-गौसुल आजम जैसे कार्यक्रम लोगों को मोहब्बत, सेवा और भाईचारे का संदेश देते हैं।कार्यक्रम के दौरान नातख्वानों ने अपने-अपने कलाम पेश किए। नातों की रूहानी महफिल के दौरान अकीदतमंद अकीदत में झूमते नजर आए और पूरा माहौल सूफियाना रंग में रंग गया।

कार्यक्रम के अंत में सूफी राशिद अली साबरी की मौजूदगी में शाह गाजी मियां ने मुल्क में अमनो-सलामती और तमाम अकीदतमंदों के लिए विशेष दुआ कराई।अंजुमन गुलामाने मुस्तफा सोसायटी के सेक्रेट्री राहिल कुरैशी ने कहा कि सोसायटी की ओर से पैगम्बर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं और सूफी परंपरा के संदेश को आम करने के लिए लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने बताया कि ग्यारहवीं शरीफ के मौके पर दूर-दराज से पहुंचे अकीदतमंदों ने कार्यक्रम में शिरकत की।चादरपोशी और दुआ के बाद नमाज-ए-जुहर के पश्चात सज्जादानशीन की कोठी पर लंगर-ए-आम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की।

गौरतलब है कि जश्न-ए-गौसुल आजम हजरत शेख अब्दुल कादिर जीलानी रहमतुल्लाह अलैह की याद में मनाया जाता है। सूफी परंपरा में उन्हें ‘गौस-ए-आजम’ के नाम से जाना जाता है। इस मौके पर कुरआन ख्वानी, फातिहा, नातख्वानी, चादरपोशी, लंगर और अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

इस मौके पर आलम सैफी, कल्लू भाई, परवेज आलम, फैसल खान उर्फ मोंटू, आदिल कुरैशी, सावेज खान, शाहबाज उर्फ गुल्लू, शम्स अली साबरी, रिहान कुरैशी, वाजिद अंसारी, रियाज कुरैशी,प्रवेज आलम रईस अंसारी, हाजी गुलजार, शफीक साबरी, शालू कुरैशी समेत बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।