दरगाह साबिर पाक में बारिश से बिगड़े हालात, जनता ने संभाला मोर्चा — विधायक, नगर पंचायत और सफाई व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

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पिरान कलियर। लगातार हो रही बारिश के चलते दरगाह हज़रत साबिर पाक परिसर और आसपास के क्षेत्रों में जलभराव की गंभीर स्थिति पैदा हो गई। हालात ऐसे बने कि दरगाह परिसर में पानी भरने लगा और मजार शरीफ के अंदर पानी पहुंचने का खतरा पैदा हो गया। ऐसे समय में प्रशासन और जिम्मेदार विभागों के बजाय स्थानीय खादिमों और आस्थावान लोगों ने मोर्चा संभाला।

खादिम इमरान साबरी, आलीशान साबरी, सुपरवाइजर शरीक अली, सभासद गुलफाम अली, अजीम सिद्दीकी सहित अनेक आस्थावान लोग सुबह से ही लगातार दरगाह परिसर में जमा बारिश का पानी निकालने में जुटे रहे। सभी ने घंटों मेहनत कर पानी की निकासी की और मजार शरीफ के अंदर पानी प्रवेश न करे, इसके लिए लगातार प्रयास करते रहे।

तीन बार के विधायक, फिर भी नहीं मिली जलभराव से राहतसबसे बड़ा सवाल स्थानीय विधायक पर खड़ा हो रहा है। लगातार तीन बार विधायक बनने के बावजूद आज तक कलियर की सबसे बड़ी समस्या जल निकासी का स्थायी समाधान नहीं हो सका। हर बरसात में वही हालात दोहराए जाते हैं और आम लोगों के साथ दरगाह आने वाले जायरीन भी परेशान होते हैं। क्षेत्र में जगह-जगह जलभराव से लोगों का आवागमन प्रभावित है।

नगर पंचायत की सफाई व्यवस्था पर भी सवाल नगर पंचायत पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि बरसात से पहले नालियों और नालों की प्रभावी सफाई नहीं कराई गई, जिसके कारण बारिश का पानी सड़कों और गलियों में भर गया। यदि समय रहते सफाई होती तो शायद हालात इतने खराब नहीं होते।

लोगों का कहना है कि यदि दरगाह परिसर और आसपास के नालों की समय रहते सफाई कराई जाती तो दरगाह में पानी भरने जैसी स्थिति नहीं बनती। सफाई व्यवस्था में लापरवाही के कारण श्रद्धालुओं और खादिमों को स्वयं पानी निकालने के लिए मैदान में उतरना पड़ा।

जनता बोली — जब जिम्मेदार नाकाम रहे, तब लोगों ने निभाई जिम्मेदारीस्थानीय लोगों का कहना है कि जब जिम्मेदार विभाग और जनप्रतिनिधि व्यवस्था संभालने में विफल रहे, तब खादिमों, सभासद और आस्थावान नागरिकों ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए दरगाह की सेवा की। लोगों का मानना है कि हर साल ऐसी स्थिति बनना यह दर्शाता है कि स्थायी समाधान की दिशा में अब तक पर्याप्त काम नहीं हुआ।

अब क्षेत्र की जनता पूछ रही है — आखिर हर साल जलभराव की यह समस्या कब खत्म होगी? क्या जिम्मेदार अधिकारी, जनप्रतिनिधि और संबंधित विभाग स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे, या फिर हर बरसात में आम लोगों और खादिमों को ही हालात संभालने पड़ेंगे?