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देहरादून।अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित ऑडियो और वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के मामले में पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की गिरफ्तारी ने उत्तराखंड की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। विभिन्न थानों में दर्ज मुकदमों के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और सोमवार को कड़ी पूछताछ के बाद देहरादून जेल भेज दिया।

जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए कथित ऑडियो और वीडियो क्लिप में भाजपा के कुछ वरिष्ठ नेताओं के बारे में आपत्तिजनक एवं मानहानिकारक टिप्पणियां किए जाने का आरोप है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इन सामग्रियों के माध्यम से उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया।इस मामले में हरिद्वार के झबरेड़ा और बहादराबाद थानों के साथ-साथ देहरादून के नेहरू कॉलोनी और डालनवाला थानों में अलग-अलग मुकदमे दर्ज कराए गए थे। शिकायतों के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और डिजिटल साक्ष्य जुटाने के बाद पूर्व विधायक सुरेश राठौर के खिलाफ कार्रवाई की।
मामले की जांच कर रहे डालनवाला थानाध्यक्ष इंस्पेक्टर संतोष सिंह कुंवर ने सुरेश राठौर से लंबी पूछताछ की। पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में देहरादून जेल भेज दिया गया। वहीं सह-आरोपी उर्मिला सनावर के संबंध में भी कानूनी प्रक्रिया जारी है।गौरतलब है कि हाल ही में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सुरेश राठौर के खिलाफ दर्ज चार एफआईआर में से दो को निरस्त कर दिया था, जबकि शेष दो मामलों में जांच जारी रखने की अनुमति दी थी। इसी के बाद पुलिस ने शेष मामलों में कार्रवाई को आगे बढ़ाया।शिकायतकर्ता दुष्यंत गौतम और आरती गौर का आरोप है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने की नीयत से तैयार और साझा की गई थी।
दूसरी ओर सुरेश राठौर लगातार इन आरोपों को निराधार बताते रहे हैं और उन्होंने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमों को न्यायालय में चुनौती भी दी थी।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी डिजिटल साक्ष्यों, ऑडियो-वीडियो क्लिप और अन्य तथ्यों की गहन जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आवश्यकतानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उल्लेखनीय है कि अंकिता भंडारी प्रकरण की सीबीआई जांच भी जारी है। राठौर और उर्मिला सनावर के बीच हुई कथित बातचीत में कथित वीआईपी के रूप में पूर्व संगठन महामंत्री अजेय कुमार तथा प्रभारी दुष्यंत गौतम का नाम सामने आने के बाद यह मामला और अधिक चर्चाओं में आ गया है। पूर्व विधायक की गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने के बाद यह प्रकरण अब एक नए और नाटकीय मोड़ पर पहुंच गया है।