हरिद्वार सिटी हॉस्पिटल साझेदारी विवाद
सिटी हॉस्पिटल से जुड़ी साझेदारी फर्म में वित्तीय अनियमितताओं और कूटरचना का आरोप लगाते हुए डॉ. सुमन्तु विरमानी ने सात लोगों पर मुकदमा कराया है। डॉ. सुमन्तु विरमानी सिटी अस्पताल में पार्टनर थे और हड्डी रोग विभाग भी देखते थे। पिछले साल सिडकुल कर्मी के ऑपरेशन के दौरान मौत के बाद डॉ. सुमन्तु विरमानी विवादों में जुड़ गए थे। श्रमिकों ने उनके खिलाफ प्रदर्शन किया था। जिसके बाद उनके दूसरे अस्पताल को सील कर दिया गया था। हालांकि बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था। इसके बाद से ही सिटी अस्पताल में साझेदारी को लेकर विवाद चल रहा है।
पुलिस ने सतीश विरमानी, एस के कपूर, विक्रम विरमानी, शकुंतला देवी, अमित विरमानी, लता मेहता, ऋचा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है।
हरिद्वार सिटी हॉस्पिटल साझेदारी विवाद
क्या है मामला : डॉ. सुमन्तु विरमानी ने बताया कि वह वर्ष 2000 से M/s Haridwar Land & Financiers (City Hospital) नामक साझेदारी फर्म में विधिवत साझेदार रहे हैं। वर्ष 2005 में फर्म का पुनर्गठन किया गया था, जिसमें कई अन्य साझेदारों को शामिल किया गया।
डॉ. विरमानी का आरोप है कि वर्ष 2015 में फर्म के नाम से आईडीबीआई बैंक, चंद्राचार्य चौक हरिद्वार में एक बैंक खाता खोला गया, जिसमें उनके फर्जी हस्ताक्षर कर खाते का संचालन किया गया। आरोप है कि यह खाता एस. के. कपूर सहित अन्य साझेदारों की मिलीभगत से खोला गया और कई वर्षों तक उनके संज्ञान और अनुमति के बिना उपयोग किया जाता रहा।
शिकायत के अनुसार वर्ष 2018 में उन्हें कथित रूप से अवैध तरीके से फर्म से निष्कासित कर दिया गया और बाद में एक कथित रूप से जाली साझेदारी विलेख के आधार पर पंजाब नेशनल बैंक में नया खाता खोला गया, जिसमें उन्हें साझेदार के रूप में शामिल नहीं किया गया।
डॉ. विरमानी का कहना है कि 5 जनवरी 2019 को आईडीबीआई बैंक खाते से 10,81,429 रुपये की राशि निकालकर उक्त पीएनबी खाते में स्थानांतरित कर दी गई। उन्होंने कई बार संबंधित लोगों से धनराशि का ब्यौरा और वापसी की मांग की, लेकिन उन्हें टालते रहे।
काफी समय बाद उन्होंने 24 दिसंबर 2025 को एस. के. कपूर और अन्य साझेदारों को कानूनी नोटिस भेजा, जिसका उत्तर 27 दिसंबर 2025 को देते हुए उनकी मांग को अस्वीकार कर दिया गया। आरोप है कि इसके बाद मुलाकात के दौरान आरोपितों ने उन्हें झूठे मुकदमे में फंसाने और जान से मारने की धमकी भी दी।