गुशल शरीफ की पाक रस्म में ‘नहाने’ पर उठे सवाल, अकीदतमंदों ने दरगाह प्रशासन से की रोक लगाने की मांग

News 129 कलियर। विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत साबिर पाक के 758वें सालाना उर्स की तैयारियों के बीच उर्स की प्रमुख रस्म गुशल शरीफ को लेकर अकीदतमंदों ने दरगाह प्रशासन के सामने एक अहम मांग रखी है। जायरीनों का कहना है कि गुशल शरीफ की पवित्र रस्म के दौरान मजार-ए-मुकद्दस के अंदर हुजूर साबिर पाक के कदमों के पास किसी भी व्यक्ति को मस्क आदि से नहाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

अकीदतमंदों के मुताबिक गुशल शरीफ के दौरान दरगाह साबिर पाक को गुलाब जल और केवड़ा जल से नहलाने की पवित्र रस्म अदा की जाती है। 757वें उर्स में भी यह रस्म विधिवत अदा की गई थी।जायरीनों का कहना है कि पिछले उर्स के दौरान एक वीडियो सामने आया था, जिसमें कुछ लोग मजार के अंदर हुजूर के कदमों के पास बैठकर मस्क से नहाते दिखाई दिए थे। वीडियो सामने आने के बाद अकीदतमंदों में नाराजगी जताई गई थी और इसे दरगाह की पवित्रता व लोगों की भावनाओं से जुड़ा मामला बताया गया था।

‘पाक रस्म को अपनी जगह, नहाने की इजाजत नहीं’अकीदतमंदों का कहना है कि लोगों के शरीर से उतरने वाला पानी फर्श पर बहता है और बाद में कुछ लोग उसे आस्था के नाम पर बोतलों में भरकर अपने घर ले जाते हैं। कई लोग इस पानी को प्रसाद/बरकत समझकर पीने की बात भी सामने रखते हैं। जायरीनों का कहना है कि इससे पवित्र रस्म की गरिमा को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

इस बार अकीदतमंदों ने दरगाह प्रशासन से मांग की है कि गुशल शरीफ की रस्म को पूरी अकीदत और मर्यादा के साथ कराया जाए तथा मजार-ए-मुकद्दस के अंदर हुजूर साबिर पाक के कदमों के पास किसी को भी नहाने की अनुमति न दी जाए।

जायरीनों का कहना है कि दरगाह की पवित्रता और लाखों अकीदतमंदों की भावनाओं को देखते हुए गुशल शरीफ के दौरान व्यवस्था पहले से स्पष्ट की जाए, ताकि किसी भी ऐसी गतिविधि से विवाद या आस्था को ठेस पहुंचने की स्थिति पैदा न हो।

अकीदतमंदों की मांग है कि 758वें उर्स में गुशल शरीफ की पाक रस्म अपनी गरिमा, अनुशासन और मर्यादा के साथ संपन्न हो।