आर्थिक तंगी से जूझ रहा था कोली, फोन पर किसी से हुई थी बहस
निठारी कांड देश के चर्चित निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि सुरेंद्र कोली पिछले कुछ समय से अपनी असली पहचान छिपाकर “सदाराम” नाम से रह रहा था और रोशनाबाद स्थित एक पॉश सोसायटी में नाइट वॉचमैन का काम कर चुका था। पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
रोशनाबाद की दीपगंगा सोसायटी में किया नाइट वॉचमैन का काम
पुलिस जांच के अनुसार सुरेंद्र कोली ने रोशनाबाद स्थित दीपगंगा सोसायटी में करीब 15 दिनों तक नाइट वॉचमैन के रूप में काम किया। सोसायटी के लोगों का कहना है कि वह खुद को “सदाराम” बताता था और किसी को भी उसकी असली पहचान की जानकारी नहीं थी।
चार दिन पहले खोली थी चाय की दुकान
जांच में सामने आया है कि करीब चार दिन पहले सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में चाय की दुकान शुरू की थी। दिल्ली के नरेला निवासी धर्मेंद्र कौशिक ने उसकी मदद की थी। धर्मेंद्र ने सिडकुल निवासी ठेकेदार जय कश्यप से उसकी बातचीत कराई थी। बताया जा रहा है कि जय कश्यप का परिचय एक महिला अधिवक्ता ने कराया था।
दुकान के लिए दी थी सिक्योरिटी मनी
जानकारी के मुताबिक पूर्व जेल विजिटर अनिल शर्मा ने सुरेंद्र कोली को सात हजार रुपये प्रतिमाह किराये पर दुकान उपलब्ध कराई थी। दुकान लेने के लिए उसने 14 हजार रुपये सिक्योरिटी मनी भी जमा कराई थी।
आर्थिक तंगी से जूझ रहा था कोली
जांच में यह भी सामने आया है कि सुरेंद्र कोली आर्थिक परेशानियों से गुजर रहा था। बताया जा रहा है कि उसके पास अपने बच्चे के जन्मदिन पर उपहार खरीदने तक के पैसे नहीं थे। वह कुंभ मेले के दौरान संभावित भीड़ में चाय बेचकर कुछ कमाई करने की उम्मीद में दुकान चला रहा था।
फोन पर बहस के बाद था परेशान
सूत्रों के अनुसार घटना से पहले सुरेंद्र कोली की किसी व्यक्ति से फोन पर बहस हुई थी, जिसके बाद वह काफी परेशान दिखाई दे रहा था। धर्मेंद्र कौशिक का दावा है कि घटना से एक दिन पहले शाम को उसकी सुरेंद्र से आखिरी मुलाकात हुई थी और उसने उसे ढाई हजार रुपये भी दिए थे।
बैग से मिली दो अलग-अलग पहचान
पुलिस को सुरेंद्र कोली के बैग से दो पहचान पत्र मिले हैं। एक पुराना पहचान पत्र “सदाराम पुत्र शंकर निवासी अल्मोड़ा” के नाम पर मिला, जबकि दूसरा आधार कार्ड “सुरेंद्र कोली पुत्र शंकर निवासी सेक्टर-31, नोएडा” के नाम का है। हरिद्वार में वह सभी लोगों के बीच खुद को सदाराम बताकर रह रहा था।
सभी का दावा—असली पहचान की नहीं थी जानकारी
धर्मेंद्र कौशिक, जय कश्यप, अनिल शर्मा समेत जिन लोगों का सुरेंद्र कोली से संपर्क रहा, उनका कहना है कि उन्हें उसकी वास्तविक पहचान और निठारी कांड से जुड़े होने की कोई जानकारी नहीं थी। पुलिस सभी संबंधित लोगों के बयान दर्ज कर रही है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार, जांच जारी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार सुरेंद्र कोली डायबिटीज का मरीज था। उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई और हरिद्वार में वह फर्जी पहचान के साथ कैसे रह रहा था, इसकी जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों पर स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच में जुटी है।