(news129)
दरगाह के बड़े घोटालों पर चुप्पी, लेकिन एक बहाली पर रोज़ ‘ब्रेकिंग न्यूज़’
तथाकथित पत्रकारों की ये बौखलाहट बहुत कुछ कहती है,कुछ पोर्टल अब निष्पक्ष खबर नहीं, बल्कि ‘सुपारी नैरेटिव’ और किसी के इशारे पर प्रायोजित अभियान चलाते दिखाई दे रहे हैं। जिसे हर दिन उठते-बैठते सिर्फ एक ही नाम दिखाई दे, समझ जाइए मामला पत्रकारिता का नहीं, बल्कि अंदरूनी सेटिंग, लालच और साठगांठ का है।

सवाल अब खबरों पर नहीं… बल्कि तथाकथित पत्रकारों की नीयत और उनके पीछे छिपे आकाओं पर उठ रहे हैं।दरगाह प्रबंधन को अस्थिर करने की बड़ी साजिश या निजी स्वार्थ की जंग?
विश्व प्रसिद्ध दरगाह पिरान कलियर शरीफ में वर्ष 2017 में चिराग रोशन एवं अन्य मुख्य सेवाओं हेतु की गई मो० रफी की नियुक्ति को लेकर एक बार फिर सुनियोजित तरीके से विवाद खड़ा किया जा रहा है।विश्वस्त सूत्रों के अनुसार, दरगाह कार्यालय में पहले से तैनात कुछ प्रभावशाली एवं विवादित कर्मचारी स्वयं सामने आने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इसलिए वे बाहरी व्यक्तियों और कुछ तथाकथित सोशल मीडिया पत्रकारों को आगे कर लगातार झूठी शिकायतें, भ्रामक पोस्ट और एकतरफा खबरें प्रकाशित करवा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2017 में मो० रफी की नियुक्ति के विरुद्ध साज़िश के तहत शिकायत कराकर तत्कालीन जांच को प्रभावित कराया गया था, जिसके बाद उनकी नियुक्ति निरस्त हुई थी। इसके बावजूद मो० रफी लगातार जनप्रतिनिधियों एवं शासन-प्रशासन से न्याय की गुहार लगाता रहा और अंततः सच की जीत हुई।खुद दागदार, फिर भी दूसरों पर कीचड़ उछालने का दोहरा चरित्र!
अब क्षेत्र की जनता के बीच सबसे बड़ा प्रश्न यह उठ रहा है कि जब हाल ही में भ्रष्टाचार और गंभीर अनियमितताओं के आरोपों में हटाए गए लगभग 7 कर्मचारियों की दोबारा बहाली हुई, तब कोई आंदोलन नहीं हुआ, कोई सोशल मीडिया अभियान नहीं चला और न ही किसी तथाकथित पत्रकार ने माननीय मुख्यमंत्री या उच्च अधिकारियों के पास जाने की बातें कीं। लेकिन केवल मो० रफी की बहाली होते ही प्रतिदिन सुबह-शाम खबरें प्रकाशित होना आखिर किस गंदे एजेंडे की ओर संकेत करता है?
वर्तमान में भी दरगाह कार्यालय में ऐसे कर्मियों को 2-3 बार बहाल किया जा चुका है, जो कि बड़े-बड़े वित्तीय और प्रशासनिक आरोपों में घिरे होने के बाद दरगाह कार्यालय से हटाए जा चुके हैं। लेकिन तथाकथित पत्रकारों का कैमरा और कलम उन पर कभी नहीं चलती।सबसे बड़ा सच: खुद बाहरी होकर, दूसरों को बाहरी बता रहे!
खोखले दावों की खुली पोल:स्थानीय लोगों और दरगाह से जुड़े सूत्रों का साफ कहना है कि आज दरगाह पिरान कलियर में तैनात अधिकतर कर्मचारी बाहरी (गैर-स्थानीय) हैं, जो सालों से मलाईदार पदों पर बैठकर दरगाह में ड्यूटी दे रहे हैं। अधिकतर बाहरी लोग ही आज दरगाह कर्मी बनकर व्यवस्था चला रहे हैं। लेकिन इन तथाकथित पत्रकारों और अंदरूनी गुटबाजों को वो तमाम बाहरी लोग दिखाई नहीं देते। सिर्फ एक आदमी (मो० रफी) को ‘बाहरी’ बोलकर टारगेट किया जा रहा है, जो इनके दोहरे चरित्र और प्रायोजित एजेंडे को साफ उजागर करता है।
क्या यह पत्रकारिता है या किसी अंदरूनी गुट का प्रायोजित ब्लैकमेलिंग अभियान?लगातार एक ही न्यूज पोर्टल द्वारा रोज़ एक जैसी स्क्रिप्ट पर खबरें प्रकाशित कर केवल मो० रफी को निशाना बनाना कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है:क्या दरगाह प्रबंधन को अस्थिर कर अपने निजी स्वार्थ पूरे करने की कोशिश की जा रही है?क्या कुछ लोग स्वयं के दागदार रिकॉर्ड और दरगाह में चल रहे बड़े कारनामों से ध्यान हटाने के लिए मो० रफी को मोहरा बना रहे हैं?एक ही राग रोज़ अलापने वाले इन तथाकथित पत्रकारों को दरगाह के असल मुद्दों और अन्य बड़े मामलों पर सांप क्यों सूंघ जाता है?स्थानीय लोगों में चर्चा है कि मो० रफी के विरुद्ध तथाकथित “हल्की जांच” को बार-बार इस तरह बढ़ा-चढ़ाकर प्रचारित किया जा रहा है मानो कोई बहुत बड़ा घोटाला हुआ हो, जबकि विरोध करने वाले इन तथाकथित चेहरों और कर्मचारियों के खुद के दामन पर गंभीर दाग हैं और इनके खिलाफ विभागीय जांचें और निलंबन की कार्रवाई पहले से ही इतिहास का हिस्सा रही हैं।
प्रशासनिक व्यवस्था पर दबाव बनाने का घटिया खेलदरगाह के बुद्धिजीवियों और स्थानीय जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि शासन और प्रशासन ने पूरी विधिक प्रक्रिया, नियमों और जांच के तहत यह बहाली की है, तो कुछ लोगों के इशारे पर तथाकथित पत्रकारों द्वारा ‘मीडिया ट्रायल’ चलाकर अधिकारियों पर दबाव बनाना न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास है, बल्कि आस्था के इस बड़े केंद्र की छवि को भी धूमिल करने की साजिश है।अब देखना यह होगा कि शासन और उच्च प्रशासन दरगाह में वर्षों से जमे इन विवादित तत्वों, ब्लैकमेलिंग की राजनीति करने वाले तथाकथित पत्रकारों और अंदरूनी दबाव बनाने वाले गुटों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करता है, या फिर केवल एक व्यक्ति को निशाना बनाकर चलाए जा रहे इस ‘सुपारी अभियान’ के आगे झुकेगा। स्थानीय जनता अब इस पूरे ड्रामे और इसके पीछे के असली किरदारों को अच्छी तरह समझ चुकी है।
