पिरान कलियर। दरगाह क्षेत्र के नवाब बाजार स्थित बहुउद्देशीय साधन/किसान सेवा सहकारिता समिति लि. के सहकारी मिनी बैंक की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि बैंक में प्रतिदिन किसानों, खाताधारकों और आम लोगों का बड़ी संख्या में आना-जाना रहता है तथा लाखों रुपये का लेनदेन होता है। इसके बावजूद बैंक की सुरक्षा व्यवस्था देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे जिम्मेदार विभाग किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा हो।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बैंक के बाहर तक यह स्पष्ट करने वाला कोई प्रमुख बोर्ड नहीं लगा है कि यहां सहकारी मिनी बैंक संचालित हो रहा है।
सबसे गंभीर सवाल बैंक की सुरक्षा को लेकर है। लोगों के मुताबिक बैंक में न तो कोई सुरक्षा गार्ड तैनात दिखाई देता है और न ही सुरक्षा के ऐसे पुख्ता इंतजाम नजर आते हैं, जो रोजाना होने वाले भारी वित्तीय लेनदेन वाले बैंक में होने चाहिए।
बड़ी घटना हुई तो जिम्मेदारी किसकी?लोगों का सवाल है कि यदि बैंक में किसी दिन चोरी, लूट, विवाद या कोई अन्य अप्रिय घटना घट जाती है तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? क्या घटना होने के बाद विभागीय अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की बात करेंगे या फिर जिम्मेदारी किसी अन्य पर डाल दी जाएगी?
जब बैंक में रोजाना बड़ी रकम का लेनदेन होता है तो सुरक्षा को लेकर इतनी बड़ी कथित लापरवाही आखिर क्यों बरती जा रही है, यह जांच का विषय है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि बैंक की व्यवस्थाओं को लेकर विभागीय स्तर पर भी पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बैंक जैसी संवेदनशील वित्तीय संस्था में सुरक्षा व्यवस्था, स्पष्ट पहचान बोर्ड और ग्राहकों की सुविधा से जुड़ी व्यवस्थाएं प्राथमिकता में होनी चाहिए, लेकिन यहां इन बुनियादी व्यवस्थाओं को लेकर ही सवाल उठ रहे हैं।
कर्मचारियों के व्यवहार पर भी सवाल, आए दिन शिकायतों का आरोपवहीं बैंक में तैनात कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर भी स्थानीय लोगों में नाराजगी बताई जा रही है। आरोप है कि किसानों और बैंकिंग कार्य के लिए पहुंचने वाले लोगों से कर्मचारियों का व्यवहार उचित नहीं रहता। लोगों का कहना है कि बैंक में किसी न किसी बात को लेकर शिकायतें सामने आती रहती हैं। हालांकि कर्मचारियों के खिलाफ लगाए जा रहे इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।लोगों का यह भी कहना है कि बैंक में तैनात दोनों कर्मचारी काफी समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में उनकी कार्यप्रणाली, जनता के साथ व्यवहार और लंबे समय से एक ही स्थान पर तैनाती की विभागीय स्तर पर समीक्षा होना जरूरी है।
ARCS महाप्रबंधक से जांच और कार्रवाई की मांगस्थानीय लोगों ने ARCS कार्यालय हरिद्वार के महाप्रबंधक/जनरल मैनेजर से पूरे मामले का संज्ञान लेने की मांग की है। लोगों की मांग है कि बैंक में तैनात दोनों कर्मचारियों की कार्यप्रणाली और व्यवहार की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा बैंक में सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का भी निरीक्षण कराया जाए।इसके साथ ही बैंक के बाहर स्पष्ट और बड़ा पहचान बोर्ड लगवाने, पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने तथा रोजाना होने वाले वित्तीय लेनदेन को देखते हुए आवश्यक सुरक्षा मानकों की जांच कराने की मांग की गई है।
सवाल यह है—किसी घटना के बाद जागेगा विभाग या पहले सुधरेगी व्यवस्था?सहकारी मिनी बैंक में यदि वास्तव में रोजाना लाखों रुपये का लेनदेन हो रहा है तो सुरक्षा को लेकर बरती जा रही कथित लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बैंक की सुरक्षा केवल कर्मचारियों की नहीं, बल्कि वहां आने वाले किसानों, खाताधारकों और आम जनता की सुरक्षा से भी जुड़ा मामला है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या ARCS विभाग बैंक की सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की जांच कराएगा, या फिर किसी अप्रिय घटना के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की नींद खुलेगी? स्थानीय लोगों की नजर अब विभागीय अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी है।