अतीक साबरी:-
कलियर/रुड़की: विकास की रफ़्तार या विनाश का मार्ग? कलियर क्षेत्र के बेडपुर चौक से मुक़र्रबपुर होकर गुजरने वाले ग्रामीणों के लिए यह सवाल अब नासूर बन चुका है। गुरुवार को स्थानीय लोगों के सब्र का बांध उस वक्त टूट गया जब धूल के गुबार और गहरे गड्ढों के बीच से गुजरते ओवरलोड खनन डंपरों ने उनका रास्ता रोका।
आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़कों पर टायर डालकर डंपरों को मौके पर ही रोक दिया और व्यवस्था के खिलाफ जमकर हुंकार भरी।
हादसों को दावत देती सड़कें, सिस्टम मौन:-ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि खनन की परमिशन की आड़ में डंपर संचालक नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। क्षमता से अधिक मिट्टी लादकर दौड़ते इन भारी वाहनों ने मुक़र्रबपुर और पीपल चौक जैसे भीड़भाड़ वाले इलाकों की सड़कों को छलनी कर दिया है।
जानलेवा गड्ढे: सड़क पर अब डामर कम और गहरे गड्ढे ज्यादा नजर आते हैं, जिनमें गिरकर कई राहगीर अस्पताल पहुंच चुके हैं।
धूल का कहर: उड़ती धूल के कारण स्थानीय निवासियों को सांस की बीमारियां घेर रही हैं और दुकानदारों का व्यापार चौपट हो रहा है।
मौके पर तीखी नोकझोंक, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल:-प्रदर्शनकारी राजा, सनव्वर अंसारी, साकिर, शाहरुख और गुलजार ने डंपर चालकों को खरी-खोटी सुनाते हुए स्पष्ट कहा कि “मुनाफा चंद लोगों का हो रहा है, लेकिन जान जोखिम में आम जनता की है।” ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि आखिर भारी आबादी वाले इन रास्तों से बेरोकटोक ओवरलोड वाहन कैसे गुजर रहे हैं? क्या संबंधित विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
आश्वासन पर खुला जाम, पर समाधान पर संशय काफी देर तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद डंपर चालकों ने हार मानकर ग्रामीणों की शर्तों को स्वीकार किया। उन्होंने जल्द गड्ढे भरवाने, नियमित पानी का छिड़काव करने और आबादी वाले क्षेत्र में वाहनों की गति धीमी रखने का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने रास्ता छोड़ा। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल तात्कालिक राहत है। जब तक प्रशासन ओवरलोडिंग पर सख्त कार्रवाई नहीं करता, तब तक समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है।