हरिद्वार में रेडियोलॉजिस्ट होने के बावजूद मरीजों को नहीं मिल रही जांच की सुविधा, खानपुर से आए ग्रामीणों को भी बिना एक्सरे कराए लौटना पड़ा
जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. राजेश गुप्ता पर जनहित में सेवाएं नहीं देने के आरोप, क्रिकेट प्रतियोगिता के लिए विशेष अवकाश लेने पर उठे सवाल
मेडिको लीगल मामलों में मरीजों को देहरादून किया जा रहा रेफर, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल
हरिद्वार की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था का हाल यह है कि यहां एक्सरे और अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी जांचों के लिए भी मरीजों को देहरादून के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जनपद में रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध होने के बावजूद आम जनता को उनकी सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। मेडिको लीगल मामलों में एक्सरे की आवश्यकता होने पर लोगों को दूसरे जनपदों में रेफर किया जा रहा है। बुधवार को खानपुर क्षेत्र से मेडिकल परीक्षण के लिए हरिद्वार पहुंचे ग्रामीणों को भी मेला अस्पताल में एक्सरे की सुविधा नहीं मिली और उन्हें देहरादून जाने की बात कहकर वापस भेज दिया गया।
इस स्थिति ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर आम आदमी एक्सरे और अल्ट्रासाउंड के लिए सरकारी अस्पतालों के चक्कर काट रहा है, वहीं दूसरी ओर हरिद्वार में तैनात रेडियोलॉजिस्ट डॉ. राजेश गुप्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर वह अपनी विशेषज्ञ सेवाएं अस्पताल में क्यों नहीं दे रहे हैं।
दो रेडियोलॉजिस्ट, फिर भी जनता को नहीं मिल रही सुविधा
जानकारी के अनुसार हरिद्वार में रेडियोलॉजी विशेषज्ञ के तौर पर डॉ. राजेश गुप्ता और डॉ. मनीष दत्त की मौजूदगी है। डॉ. राजेश गुप्ता जिला अस्पताल के पीएमएस की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि डॉ. मनीष दत्त को कुंभ मेला स्वास्थ्य अधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है। बताया जाता है कि पूर्व में डॉ. मनीष दत्त को कुंभ मेला स्वास्थ्य अधिकारी के साथ-साथ मेला अस्पताल में भी रेडियोलॉजिस्ट के रूप में सेवाएं देने के निर्देश दिए गए थे।
हालांकि, वर्तमान में वह कोर्ट से संबंधित पॉक्सो मामलों में आयु निर्धारण सहित कुछ महत्वपूर्ण मेडिकल परीक्षण कर रहे हैं। इसके चलते सामान्य अल्ट्रासाउंड और मेडिको लीगल एक्सरे की जरूरत वाले लोगों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही है। नतीजतन, हरिद्वार शहर ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों और पीड़ितों को भी दूसरे जनपदों की ओर रुख करना पड़ रहा है।
पीएमएस की जिम्मेदारी या विशेषज्ञ सेवाओं से दूरी?
सबसे बड़ा सवाल जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ. राजेश गुप्ता की भूमिका को लेकर उठ रहा है। डॉ. गुप्ता रेडियोलॉजिस्ट हैं और जिला अस्पताल की प्रशासनिक जिम्मेदारी भी उनके पास है, लेकिन आरोप है कि पीएमएस बनने के बाद से वह नियमित रूप से एक्सरे और अल्ट्रासाउंड की सेवाएं नहीं दे रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग में यह तर्क दिया जा रहा है कि प्रशासनिक जिम्मेदारियों और नियमों के चलते उनसे नियमित रेडियोलॉजी सेवाएं लेना संभव नहीं है। लेकिन सवाल यह है कि जब पूरे जनपद में रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण मरीज परेशान हैं, तब क्या विभाग के स्तर पर कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बनाई जा सकती?

इससे पहले जिला अस्पताल के सीएमएस रहे डॉ. आरवी सिंह प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ ओपीडी में मरीजों को भी देखते रहे हैं। इसी तरह मेला अस्पताल के सीएमएस डॉ. शशिकांत भी प्रशासनिक दायित्वों के साथ मरीजों को ओपीडी सेवाएं देते हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाओं का जनहित में उपयोग करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं बनाई जा सकती?
क्रिकेट खेलने के लिए विशेष छुट्टी, लेकिन मरीजों के लिए समय नहीं!
इस पूरे मामले में डॉ. राजेश गुप्ता की क्रिकेट गतिविधियां भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। आरोप है कि हरिद्वार हेल्थ क्रिकेट प्रीमियर लीग में खेलने के लिए उन्होंने विशेष अवकाश लिया और प्रतियोगिता में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। इतना ही नहीं, नियमित रूप से क्रिकेट खेलने के लिए भी उनके पास पर्याप्त समय है।
ऐसे में आम जनता सवाल उठा रही है कि जब क्रिकेट प्रतियोगिताओं के लिए समय और विशेष अवकाश की व्यवस्था हो सकती है तो क्या जनपद के मरीजों को राहत देने के लिए रेडियोलॉजी सेवाएं उपलब्ध कराने का कोई रास्ता नहीं निकाला जा सकता?
बेशक प्रशासनिक नियमों और पद की जिम्मेदारियों की अपनी सीमाएं हो सकती हैं, लेकिन जब किसी जिले में विशेषज्ञ चिकित्सक की कमी के कारण मरीजों को परेशान होना पड़ रहा हो तो स्वास्थ्य विभाग को जनहित में वैकल्पिक व्यवस्था करने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए। आखिर सरकारी अस्पतालों में तैनात विशेषज्ञों की सेवाओं का लाभ जनता को कब मिलेगा?
आईएएस सौरभ गहरवार का उदाहरण देकर उठ रहे सवाल
इस मामले में स्वास्थ्य सचिव आईएएस सौरभ गहरवार का उदाहरण भी दिया जा रहा है। बताया जाता है कि सीडीओ हरिद्वार और टिहरी सहित विभिन्न जनपदों में जिलाधिकारी की जिम्मेदारी संभालने के दौरान भी उन्होंने रेडियोलॉजिस्ट के रूप में अपनी विशेषज्ञ सेवाएं दी थीं।
जब प्रशासनिक पदों पर रहते हुए भी एक आईएएस अधिकारी अपनी विशेषज्ञता का इस्तेमाल जनहित में कर सकता है तो फिर हरिद्वार में रेडियोलॉजिस्ट की कमी के बीच विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाओं का बेहतर उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा? सामाजिक कार्यकर्ता रत्नमणि डोभाल ने बताया कि जब एक आईएएस अफसर जनता के लिए अल्ट्रासाउंड कर सकता है तो राजेश गुप्ता पीएमएस रहते हुए क्यों नहीं कर रहे हैं। स्वास्थ मंत्री को चाहिए कि राजेश गुप्ता को पीएमएस पद से हटाते हुए उन्हें रेडियोलॉजिस्ट के पद पर तैनात करे।
खानपुर से आए ग्रामीणों को भी नहीं मिली राहत
कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक ऐसा पत्र वायरल हुआ था, जिसमें एक्सरे के लिए मरीज को देहरादून रेफर किए जाने की बात सामने आई थी। अब बुधवार को खानपुर क्षेत्र से आए ग्रामीणों को भी इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्रामीण अपना मेडिकल परीक्षण कराने के लिए मेला अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन वहां एक्सरे की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें देहरादून जाने के लिए कह दिया गया।
यह केवल खानपुर के ग्रामीणों की समस्या नहीं है। जनपद के रुड़की, लक्सर, खानपुर, ग्रामीण हरिद्वार और आसपास के क्षेत्रों से आने वाले लोग भी एक्सरे और अल्ट्रासाउंड के लिए सरकारी अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। जिन लोगों को चोट लगने, मारपीट या अन्य मेडिको लीगल मामलों में तत्काल एक्सरे की आवश्यकता होती है, उनके लिए दूसरे जनपद में जाना अतिरिक्त परेशानी और समय की बर्बादी का कारण बन रहा है।
हरिद्वार के 11 विधायक और एक सांसद, फिर भी स्वास्थ्य व्यवस्था पर खामोशी
हरिद्वार जनपद में 11 विधायक और एक सांसद हैं। इसके अलावा विभिन्न राजनीतिक दलों के दर्जनों नेता खुद को जनता का हितैषी बताते हैं। लेकिन सरकारी अस्पतालों में रेडियोलॉजिस्ट की कमी और मरीजों की परेशानी को लेकर अब तक कोई प्रभावी आवाज सामने नहीं आई है।
खास बात यह है कि खानपुर के निर्दलीय विधायक उमेश कुमार भी इस समस्या पर अब तक कोई ठोस पहल करते नजर नहीं आए हैं, जबकि उनकी विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण भी इस अव्यवस्था से प्रभावित हो रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जनता के सवाल, स्वास्थ्य विभाग से जवाब की मांग
हरिद्वार की जनता जानना चाहती है कि जब जनपद में रेडियोलॉजिस्ट उपलब्ध हैं तो मरीजों को देहरादून क्यों भेजा जा रहा है? जिला अस्पताल और मेला अस्पताल में एक्सरे तथा अल्ट्रासाउंड की नियमित व्यवस्था कब बहाल होगी? मेडिको लीगल मामलों में पीड़ितों को दूसरे जनपदों में भटकने से कब राहत मिलेगी? क्या स्वास्थ्य विभाग विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता और उनकी सेवाओं का उपयोग सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस आदेश जारी करेगा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? मरीजों को जांच के लिए दर-दर भटकना पड़े और जिम्मेदार व्यवस्था कोई समाधान न दे, तो आम आदमी सरकारी अस्पतालों से आखिर क्या उम्मीद करे?
क्या कहते हैं अधिकारी : सीएमओ हरिद्वार डॉ आरके सिंह ने बताया कि जनपद में रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। डॉ मनीष दत्त से मेला स्वास्थ्य अधिकारी के साथ साथ कुछ घंटे मेडिकोलीगल केस करने के लिए बोला गया है। रुड़की में सोनोलॉजिस्ट से काम चलाया जा रहा है। इस बाबत पत्र लिख दिया गया है। जल्द समस्या का हल होने की उम्मीद है।