चुनाव से पहले गुटबाजी : महानगर कांग्रेस से आलोक शर्मा गुट ने बनाई दूरी, अलग अखाड़ा जोड़ा, महानगर अध्यक्ष पर गंभीर आरोप

यूनियन भवन में जिला प्रभारी नरेंद्र राणा और शहर विधानसभा प्रभारी संजय सैनी की बैठक के बाद सियासी हलचल तेज, महानगर अध्यक्ष अमन गर्ग पर सूचना नहीं देने का आरोप

हरिद्वार। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच हरिद्वार कांग्रेस में गुटबाजी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। महानगर कांग्रेस और आलोक शर्मा गुट के बीच बढ़ती खींचतान के चलते पार्टी की अंदरूनी राजनीति गरमा गई है। मंगलवार को आयोजित एक बैठक के बाद दोनों गुटों के बीच टकराव और गहरा होने के संकेत मिले हैं।

विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर जिला प्रभारी नरेंद्र राणा और हरिद्वार शहर विधानसभा प्रभारी संजय सैनी ने यूनियन भवन में बैठक की। इस बैठक को लेकर आलोक शर्मा गुट ने महानगर अध्यक्ष अमन गर्ग पर उन्हें सूचना नहीं देने का आरोप लगाया। आलोक शर्मा गुट का कहना है कि यूनियन भवन में महानगर कांग्रेस की ओर से अपने समर्थकों को बुलाया गया था, जिसके बाद उन्होंने जिला प्रभारी नरेंद्र राणा और शहर विधानसभा प्रभारी संजय सैनी को ऋषिकुल स्थित अपने कार्यालय पर आमंत्रित किया।

इस घटनाक्रम ने हरिद्वार कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। पार्टी के भीतर अलग-अलग गुटों की सक्रियता और आपसी मतभेदों का असर पहले भी विभिन्न कार्यक्रमों में देखने को मिला है। कम संख्या में कार्यकर्ताओं की मौजूदगी के कारण कई मौकों पर नेताओं को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है।

आलोक शर्मा पर रानीपुर विधानसभा क्षेत्र में भी गुटबाजी को बढ़ावा देने के आरोप कांग्रेस के कुछ नेता पहले लगा चुके हैं। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के भीतर बढ़ती खेमेबाजी संगठन की एकजुटता के लिए चुनौती बनती नजर आ रही है।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, प्रदेश में भाजपा के खिलाफ संभावित सत्ता विरोधी माहौल का लाभ उठाने के लिए कांग्रेस को मजबूत संगठन और एकजुट रणनीति की जरूरत है। लेकिन हरिद्वार में जिस तरह से आपसी मतभेद सामने आ रहे हैं, उससे पार्टी की चुनावी तैयारियों पर असर पड़ने की आशंका है।

वहीं, महानगर कांग्रेस अध्यक्ष अमन गर्ग ने आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बैठक की सूचना सभी को दी गई थी। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच अब यह देखना अहम होगा कि पार्टी नेतृत्व इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाता है।