चांद दिखते ही गूंजेगा सूफियाना कलाम, अदा होगी मेहंदी डोरी की रस्म

अतीक साबरी

News 129 पिरान कलियर।

दरगाह साबिर पाक के 758वें सालाना उर्स की तैयारियों के बीच उर्स की प्रमुख पारंपरिक रस्मों में शामिल मेहंदी डोरी की रस्म रबीउल अव्वल का चांद दिखाई देने के बाद ईशा की नमाज के पश्चात अदा की जाएगी। रस्म को लेकर जायरीनों और अकीदतमंदों में खासा उत्साह है। चांद दिखाई देते ही दरगाह परिसर सूफियाना कलाम और रूहानी माहौल से सराबोर हो जाएगा।

सज्जादानशीन परिवार के सदस्य साहिबजादा शाह खालिक मियां साबरी ने बताया कि मेहंदी डोरी की रस्म की शुरुआत शाह अब्दुल रहीम साबरी कुद्दुसी के दौर से चली आ रही है। यह प्राचीन परंपरा आज भी उसी श्रद्धा और सम्मान के साथ निभाई जाती है। रबीउल अव्वल का चांद नजर आने के बाद ईशा की नमाज के पश्चात सज्जादानशीन की ओर से रस्म अदा की जाती है।उन्होंने बताया कि रस्म से पहले फातिहा ख्वानी होती है। इसके बाद सज्जादानशीन, जायरीनों, सूफी संतों और बस्ती के लोगों के साथ नंगे पांव अपने कदीमी घर की ओर रवाना होते हैं, जिसे आज शाह नन्हे मियां साबरी कुद्दुसी मरहूम के घर के नाम से जाना जाता है।

मेहंदी डोरी और अन्य सामग्री की व्यवस्था साहिबजादा शाह खालिक मियां साबरी की ओर से की जाती है। उन्होंने बताया कि मेहंदी और उबटन तैयार करने की परंपरा भी विशेष रूप से कुंवारी लड़कियों द्वारा निभाई जाती है। इसके बाद मेहंदी डोरी को सज्जादानशीन शाह अली ऐजाज साबरी कुद्दुसी और शाह खालिक मियां के घर से लेकर अकीदतमंद सूफियाना कलाम पढ़ते हुए दरगाह साबिर पाक के लिए रवाना होते हैं।

दरगाह पहुंचने के बाद सज्जादानशीन की ओर से मेहंदी डोरी और संदल पेश किया जाता है तथा मेहंदी साबिर पाक के मजार शरीफ पर पेश की जाती है। इसी के साथ उर्स की रूहानी और पारंपरिक रस्मों का सिलसिला शुरू हो जाता है।

साहिबजादा शाह खालिक मियां ने बताया कि मेहंदी डोरी की रस्म चांद दिखाई देने के बाद ही अदा की जाएगी। इसके बाद हजरत साबिर पाक का 758वां सालाना उर्स विधिवत शुरू हो जाएगा।