कौन थे अम्बरीष कुमार के राजनीतिक गुरु, किस पार्टी से थे, अब कौन संभालेगा भाईजी की विरासत

विकास कुमार।

हरिद्वार के जाने-माने समाजवादी नेता अम्बरीष कुमार का पिछले दिनों लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह संघर्षवादी राजनीति के प्रमुख चेहरा थे लेकिन क्या आप जानते हैं अम्बरीष कुमार ने राजनीति का ककहरा किस से सीखा था और कौन उनके राजनीतिक गुरु थे। असल में अम्बरीष कुमार की राजनीतिक पारी छात्र राजनीति से ही शुरू हो गई थी। इसके बाद उन्होंने यूथ कांग्रेस में अहम भूमिका निभाई लेकिन उनके राजनीतिक क्षमता को तलाशने और तराशने का काम हरिद्वार के उस वक्त के विधायक राजेंद्र कुमार गर्ग ने किया।

राजेंद्र कुमार गर्ग उस वक्त भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से हरिद्वार के विधायक थे जिनको कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था। वरिष्ठ पत्रकार रतनमणि डोभाल बताते हैं की अम्बरीष कुमार के पूरे राजनीतिक जीवन और उनके संघर्षों को देखें तो साफ तौर पर राजेंद्र कुमार गर्ग की झलक उनमें नजर आती है। राजेंद्र कुमार गर्ग उस समय हरिद्वार के बड़े नेता के तौर पर जाने जाते थे और हरिद्वार में मजदूर और किसान आंदोलन के लिए तमाम यूनियने राजेंद्र कुमार गर्ग की अगुवाई में ही बनी। राजेंद्र कुमार गर्ग की सरपरस्ती में आने के बाद अम्बरीष कुमार का राजनीतिक कैरियर परवान चढ़ता चला गया। इसी तरह पूर्व विधायक अम्बरीष कुमार को एक जन आंदोलनकारी नेता के तौर पर स्थापित कर दिया।

हालांकि राजेंद्र कुमार गर्ग इमरजेंसी लगने के बाद पैदल हो गए। लेकिन उनकी बनाई तमाम श्रमिक संगठन और यूनियन उनके बाद अमरीश कुमार के पीछे चलने लगी। हरिद्वार नगर निगम स्थित यूनियन भवन जहां एक वक्त अम्बरीष कुमार की तूती बोला करती थी उस राजनीतिक पाठशाला का जीता जागता उदाहरण है। वरिष्ठ पत्रकार रतनमणि डोभाल बताते हैं कि अम्बरीष कुमार चाहे जिन दल में रहे लेकिन उन्होंने कभी अपनी सेकुलर विचारधारा और जन आंदोलनकारी नीतियों को नहीं छोड़ा। वह हमेशा प्रोग्रेससिव राजनीति करते थे और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी उनकी पकड़ जबरदस्त थी। इसीलिए जब वह कभी गोष्टी करते तो देश के जाने-माने चिंतकों को उसमें बुलाते थे जिनमें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय मार्क्सवादी पार्टी के नेता भी शामिल होते थे।

कम्युनिस्ट पार्टी की श्रमिक इकाई सीटू के नेता महेंद्र ज़ख्मोला बताते हैं कि श्रमिकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती विश्वास की होती है। लेकिन अम्बरीष कुमार सिर्फ एक लौते हरिद्वार के ऐसे नेता हैं जो अगर श्रमिक आंदोलन में खड़े हुए तो श्रमिकों ने पूरे यकीन के साथ उनका दामन थामे रखा। क्योंकि उन्हें यकीन था कि अमरीश कुमार चाहे जो हो जाए उनको धोखा नहीं देंगे। वर्तमान में इस तरह की राजनीतिक शुचिता का आदमी हरिद्वार में मिलना तो मुमकिन नहीं है। यही कारण है कि आज श्रमिक आंदोलन दम तोड़ रहे हैं और श्रमिकों का बड़े पैमाने पर शोषण हो रहा है।

कौन संभालेगा उनकी राजनीतिक विरासत

वरिष्ठ पत्रकार आदेश त्यागी बताते हैं कि यह सोचने वाली बात है कि उनकी राजनीतिक विरासत को कौन संभालेगा। क्योंकि उन्होंने अपना किसी को राजनीतिक वारिश तो नही बनाया। हालाकिं दर्जनों नेता जो अम्बरीष कुमार के बलबूते व्यापारी राजनीति से लेकर मुख्य राजनीतिक दलों में अच्छे पदों पर है। लेकिन उन जैसे गुण किसी मे नज़र नही आते हैं। वहीं वरिष्ठ पत्रकार अवनीश प्रेमी ने बताया कि यह सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर अम्बरीष कुमार के बाद अब उस तरह की राजनीति या अम्बरीष कुमार की राजनीतिक विरासत को कौन संभालेगा। क्योंकि अम्बरीष कुमार के जाने के बाद अब हरिद्वार में संघर्षवादी और जन आंदोलनवादी नेता कोई नहीं रह गया है। सबसे अफसोस नाक बात यह है कि चाहे कांग्रेस हो या अन्य किसी दल में अब कोई ऐसा नेता या कार्यकर्ता या युवा नेता दिखाई भी नहीं देता, जो अपने सिद्धांतों पर खड़ा रहकर जन आंदोलनवादी नीति और राजनीति के लिए संघर्ष करें।

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