भगवानपुर:-news 129
छाप्पुर शेर अफगानपुर गांव में बुधवार-गुरुवार की रात आम के बाग में हरे पेड़ों के कथित अवैध कटान का मामला सामने आने से वन विभाग और उद्यान विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि रात के अंधेरे में सरकारी नलकूप के पास स्थित बाग में कई हरे आम के पेड़ों पर आरी चलाई गई। पेड़ों के गिरने की आवाज सुनकर ग्रामीणों ने संबंधित विभागों को सूचना देने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि कई जिम्मेदार अधिकारियों ने फोन रिसीव नहीं किया।ग्रामीणों के मुताबिक, रात के समय बाग की ओर से लगातार पेड़ों के काटे जाने की आवाजें सुनाई दे रही थीं।
संदेह होने पर कुछ ग्रामीण मौके की ओर पहुंचे तो वहां पेड़ों के कटान का काम चलता मिला। ग्रामीणों ने तत्काल वन विभाग, उद्यान विभाग और पुलिस को इसकी सूचना देने की कोशिश की। उनका कहना है कि यदि समय रहते विभागीय टीम मौके पर पहुंच जाती तो कटान को रोका जा सकता था।
फोन बजता रहा, आरी चलती रही ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से तत्काल कार्रवाई नहीं की गई। कुछ नंबरों पर संपर्क नहीं हो सका, जबकि कुछ पर कॉल रिसीव नहीं हुई। इसी दौरान बाग में पेड़ों के कटान का सिलसिला जारी रहा। ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय निगरानी व्यवस्था इतनी कमजोर रही कि कथित रूप से कटे पेड़ों की लकड़ी वाहनों में लादकर ले जाने तक कार्रवाई नहीं हो सकी।
सुबह ग्रामीणों ने बाग का जायजा लिया तो कई पेड़ों के कटे हुए ठूंठ दिखाई दिए। घटना के बाद गांव में नाराजगी है और ग्रामीण पूरे मामले की जांच की मांग कर रहे हैं।
वन और उद्यान विभाग की भूमिका पर सवाल घटना ने सबसे बड़ा सवाल वन विभाग और उद्यान विभाग की निगरानी व्यवस्था पर खड़ा किया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभागों को हरे पेड़ों के संरक्षण और अवैध कटान रोकने की जिम्मेदारी दी गई है, तो रात में सूचना मिलने के बावजूद मौके पर टीम क्यों नहीं पहुंची? सूचना के बाद अधिकारियों की ओर से क्या कार्रवाई की गई, इसकी भी जांच की मांग उठ रही है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि मौके पर काटे गए पेड़ों की संख्या, कटान की अनुमति और लकड़ी ले जाने वाले वाहनों की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि शिकायत मिलने के बाद संबंधित अधिकारियों ने मौके पर पहुंचने में देरी क्यों की।
फिलहाल घटना को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। अब देखना यह है कि वन विभाग और उद्यान विभाग इस कथित अवैध कटान की जांच कर कार्रवाई करते हैं या मामला महज कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाता है।