हरिद्वार जिला और मेला अस्पताल में भी नहीं मिला बेड,
आम आदमी की जान की कीमत कुछ नहीं
हरिद्वार: स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला हरिद्वार में सामने आया है। खटीमा निवासी 40 वर्षीय राजू ने कथित तौर पर इलाज और बेड के अभाव में दम तोड़ दिया। गंभीर हालत में उसे हरिद्वार के मेला अस्पताल से देहरादून रेफर किया गया था, लेकिन वहां दून अस्पताल और कोरोनेशन अस्पताल में बेड उपलब्ध न होने का हवाला देते हुए उसे भर्ती नहीं किया गया। कई घंटे भटकने के बाद 108 एंबुलेंस उसे वापस हरिद्वार लेकर आई, जहां इमरजेंसी में उसकी मौत हो गई।
जानकारी के मुताबिक राजू को हरिद्वार के प्रेमनगर चौक से गंभीर हालत में मेला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में उसकी हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे उच्च चिकित्सा सुविधा के लिए देहरादून रेफर कर दिया।
इसके बाद राजू को देहरादून के दून अस्पताल और कोरोनेशन अस्पताल ले जाया गया, लेकिन दोनों जगह बेड उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर उसे भर्ती नहीं किया गया। परिजनों की अनुपस्थिति में राजू को इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। बताया जा रहा है कि शाम तक उसे उचित उपचार और भर्ती की सुविधा नहीं मिल सकी।
आखिरकार 108 इमरजेंसी सेवा राजू को लेकर वापस हरिद्वार पहुंची। यहां उसे इमरजेंसी वार्ड में रखा गया, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती रही। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक उसका ब्लड प्रेशर लगातार गिर रहा था। इलाज के प्रयासों के बीच राजू ने इमरजेंसी में ही दम तोड़ दिया।

सबसे दुखद पहलू यह रहा कि राजू खटीमा का रहने वाला था और हरिद्वार में उसका कोई अपना मौजूद नहीं था। उसकी मौत के बाद पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है। पुलिस और अस्पताल प्रशासन की ओर से उसके परिजनों से संपर्क करने का प्रयास किया जा रहा है।
अस्पताल प्रशासन ने क्या कहा?
जिला अस्पताल के प्रभारी राजेश गुप्ता ने बताया कि राजू को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था। उनके अनुसार अस्पताल में संबंधित विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं थे और बेड की भी कमी थी, जिसके चलते मरीज को देहरादून रेफर किया गया। उन्होंने बताया कि देहरादून के अस्पतालों में मरीज को भर्ती नहीं किया गया, जिसके बाद 108 एंबुलेंस उसे वापस हरिद्वार लेकर आई।
राजेश गुप्ता के मुताबिक हरिद्वार लौटने के बाद राजू को इमरजेंसी वार्ड में रखा गया था, जहां उसकी हालत लगातार गंभीर बनी रही। उसका ब्लड प्रेशर लगातार कम हो रहा था और इसी दौरान उसने दम तोड़ दिया।
राजू की मौत के बाद अब बड़ा सवाल यह है कि गंभीर मरीज को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक रेफर किए जाने के बावजूद समय पर उपचार और बेड क्यों नहीं मिल सका। घटना ने सरकारी अस्पतालों में बेड, विशेषज्ञ चिकित्सकों और गंभीर मरीजों के लिए रेफरल व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।