उत्तराखंड की देवभूमि में अपराधियों के लिए अब कोई जगह नहीं है। उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तराखंड तक आतंक का पर्याय बन चुके कुख्यात अपराधी विनय त्यागी की शनिवार सुबह एम्स ऋषिकेश के ट्रॉमा आईसीयू में मौत हो गई। 24 दिसंबर की रात रुड़की के पास पेशी पर ले जाते समय अज्ञात हमलावरों ने पुलिस वैन पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाई थीं, जिसमें विनय त्यागी गंभीर रूप से घायल हो गया था।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने इस घटना के जरिए स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रदेश में कानून से खिलवाड़ करने वालों का अंजाम बुरा होगा। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों शूटरों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
अतीक अहमद स्टाइल में हुई हत्या
विनय त्यागी की हत्या के तरीके ने उत्तर प्रदेश के अतीक अहमद कांड की यादें ताजा कर दी हैं। पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच हमलावरों ने जिस दुस्साहस के साथ गोलीबारी की, उसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए वारदात के तुरंत बाद आरोपियों को दबोच लिया।

गैंगवार या आपसी रंजिश
विनय त्यागी पर हमला आपसी रंजिश का नतीजा है या कोई गहरी साजिश, इसकी जांच जारी है। चर्चा यह भी है कि पकड़े गए शूटरों का विनय से सीधा कोई विवाद नहीं था, जिसके चलते शक की सुई ‘मास्टरमाइंड’ की तलाश में घूम रही है। पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून अपनी पूरी प्रक्रिया निभा रहा है और शूटरों के पीछे अगर कोई है तो वो भी सलाखों के पीछे जाएगा।
अपराध का ‘चलता-फिरता एटलस’ था विनय
मुजफ्फरनगर के मूल निवासी और मेरठ में पले-बढ़े विनय त्यागी का खौफ उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और उत्तराखंड तक फैला था। उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, डकैती और ठगी के करीब 60 संगीन मुकदमे दर्ज थे। काशीपुर और आसपास के इलाकों में कई गैंगों से उसकी पुरानी और गहरी दुश्मनी थी।
उत्तराखंड अब ‘सेफ ज़ोन’ नहीं
अक्सर देखा गया है कि उत्तर प्रदेश में सख्ती होने पर अपराधी उत्तराखंड को अपनी शरणस्थली समझते थे, लेकिन धामी सरकार के ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ मॉडल ने इस भ्रम को तोड़ दिया है। सरकार का संदेश: “देवभूमि में अपराध का नेटवर्क चलाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। अपराधियों की जगह या तो जेल है या फिर उनका अंत निश्चित है।”

