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दो साल तक बिना एनओसी चलता रहा स्टोन क्रशर, सिस्टम साधे रहा चुप्पी

विकास कुमार।बड़ी ही हैरानी की बात यह है कि एक क्रशर की एनओसी दो साल पूर्व खत्म हो गई थी लेकिन अब तक क्रशर बेधड़क चल रहा था। यह ठसक-हनक सत्तारुढ़ दल के विधायकों के बलबूते ही है वरना जिला प्रशासन के हाथ इस तरह सियासी बेड़ियों में जकड़े हुए न होते। बड़ा सवाल यह है कि मान लें अगर दो साल से क्रशर चल रहा था तो अब तक क्रशर स्वामी ने बड़े स्तर पर अवैध खनन कर करोड़ों के वारे न्यारे किए है, उसकी पड़ताल भला कैसे होगी, यह यक्ष प्रश्न है।

यही नहीं जब क्रशर स्वामी अभी से ही जुर्माने की रकम को कम कराने के लिए रात के अंधेरे में खनिज सामग्री को ठिकाने लगा रहा है, उसकी हनक के आगे जिला प्रशासन खामोश भला क्यों है। चचा विधायक है हमारे शीर्षक की खबर की अगली कड़ी में हम यह बता रहे है कि जिस क्रशर को अब जिला प्रशासन ने सीज किया है उसकी एनओसी मई 2019 में ही खत्म हो गई थी। चूंकि क्रशर स्वामी की निकटता दो विधायकों से जगजाहिर है इसलिए क्रशर स्वामी मनमानी करता रहा।
जिला प्रशासन के अफसर वैसे तो बेहद ही चौकन्ने है, एक अदना सा पटवारी हो या कानूनगो वह भी क्रशरों का इतिहास भूगोल उंगलियों पर लेकर चलता है फिर भला यहां चूक होने का मतलब पैदा नहीं होता है। सब के सब बहती गंगा में हाथ धोने में जुटे रहे। जल्द ही इस क्रशर स्वामी के इस अवैध क्रशर के अलावा अन्य क्रशरों के आस पास के हालात से भी जल्द रुबरु कराएंगे कि कैसे आस पास के क्षेत्र को तबाह कर करोड़ों की रकम डकारी गई है।

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