मदन को निपटाना चाहते थे मदन ने सबको कैसे निपटा दिया, अब ये करेंगे सतपाल ब्रह्मचारी

विकास कुमार/ऋषभ चौहान।
मदन कौशिक के लिए ये चुनाव पूरी तरह करो या मरो वाली स्थिति में था। खासतौर पर देहरादून से लेकर हरिद्वार तक तमाम मदन विरोधी लॉबी मदन को निपटाने में लगी हुई थी। आस—पास की सीटों वाले भी मदन की घेराबंदी कर विरोधियों को मानसिक ताकत दे रहे थे। लेकिन मदन तमाम चुनौतियों से निपटने में कामयाब रहे बल्कि उन्होंने अपने विरोधियों को भी निपटा दिया। अब हर किसी की जबान पर यही है कि मदन कौशिक को निपटाना चाहते थे लेकिन मदन ने उन सबको निपटा दिया। वहीं जिस सतपाल ब्रह्मचारी को आगे करके मदन विरोधी भाजपा खेमा मदन को हराने का ख्वाब बुन रहा था उसके भी सपने चकनाचूर हो गए। इससे ये भी साबित हो गया कि मदन विरोधी खेमे के पास नेता तो है लेकिन उनके पास वोट नहीं है। क्योंकि जो नेता मदन कौशिक का डिब्बा गोल करने का दावा कर रहे थे उन्होंने उलटा सतपाल का गलत रणनीति और चुनावी योजना के कारण सतपाल ब्रह्मचारी को ना भूलने वाली करारी शिकस्त दिला डाली।

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क्या कहते हैं वरिष्ठ पत्रकार
वरिष्ठ पत्रकार रतनमणी डोभाल कहते हैं कि मदन कौशिक के इस जीत के बाद बहुत ही प्रभावशाली बनकर उभरे हैं। लोकतंत्र में जनता का जनादेश ही सर्वमान्य होता है। सतपाल को जो विरोधी खेमा अच्छे दिनों के सपने दिखा रहा था वो उतने वोट नहीं दिला पाया। इससे ये साबित होता है कि मदन कौशिक के विरोधी खेमे के पास उन्हें कोसने के अलावा कुछ नहीं है। वहीं कांग्रेस और खासतौर पर सतपाल ब्रह्मचारी को ये सोचने की आवश्यकता है कि आखिर गलती कहां हुई है।
वरिष्ठ पत्रकार सुमित सैनी बताते है कि एक बार तो हमें भी लगने लगा कि मदन के साथ बहुत बडा भीतरघात हो गया है। लेकिन तमाम हवा के बाद भी हम मदन कौशिक को आगे रख रहे थे। इसका कारण था, मदन कौशिक का प्रबंधन और उनकी मैन टू मैन मार्किंग वाली राजनीति, जो बहुत ही कारगर साबित होती है। कांग्रेस सिर्फ नशे पर अटकी रही और दूसरे मुद्दों को नहीं उठाया है। मुझे लगता है कि मदन विरोधी खेमा बदला लेने की आग में जलने के कारण सतपाल ब्रह्मचारी के चुनाव का बेहतर प्रबंधन नहीं कर पाया। इस कारण मदन कौशिक तमाम मुश्किलों के बाद भी अच्छी जीत बनाने में कामयाब रहे।

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अजय हो गए हैं मदन कौशिक
मदन कौशिक अब हरिद्वार के लिहाज से अजय हो गए हैं। इतने विरोध और लॉबिंग के बाद भी अगर मदन कौशिक 15 हजार वोटों से जीत रहे हैं तो मदन कौशिक की ये काब​लियत ही कहा जाएगा। लेकिन फिर वही सवाल क्या मदन कौशिक सीएम का चेहरा बन पाएंगे। हालांकि उनके समर्थक इसकी मांग कर रहे हैं लेकिन ये मदन कौशिक भी जानते हैं कि उनके सामने मुश्किलें पहाड सी है जिन्हें पार पाना आसान नहीं है।

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सतपाल अब क्या करेंगे
वहीं सतपाल ब्रह्मचारी ने हार को स्वीकार करते हुए कहा कि जनता के दुख सुख में वो खडे रहेंगे और जनता के हितों को उठाते रहेंगे। हार के कारणों पर चर्चा की जाएगी। वही वरिष्ठ पत्रकार हरीश कुमार ने बताया कि सतपाल ब्रह्मचारी व्यवहार के बहुत ही अच्छे व्यक्ति हैं। लेकिन उनके चुनाव प्रबंधन में कई खामियां थी। सतपाल ब्रह्मचारी हारेंगे ये तो अनुमान था लेकिन इतनी बुरी तरह हारेंगे ये किसी को नहीं पता था। मदन कौशिक इस मामले में सच में चाणक्य साबित हुए हैं।

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