Kumbh mela corona testing scam in uttarakhand

इन पांच गलतियों से पकड़ा गया कुंभ घोटाला, कांग्रेस बोली हल्की धाराओं में हुआ मुकदमा, घोटालेबाजों को बचाने का प्रयास

विकास कुमार।
कुंभ के दौरान कोरोना टेस्टिंग में हुए घोटाले के मामले में हरिद्वार पुलिस ने दिल्ली की मैक्स कोरपोरेट सर्विस, नालवा लैब और डा. लालचंदानी लैब के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। ये मुकदमा आईपीसी की धारा 120— बी, 188, 269, 270, 420, 468, 471, महामारी एक्ट की धारा 3 और आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 53 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं कांग्रेस ने आरोप लगाया कि कोरोना जैसी महामारी में लोगों की जान से खिलवाड करने के मामले की जांच को लेकर सरकार गंभीर नहीं है और हरिद्वार जिला प्रशासन से जांच कराना मामले को हल्का करना जैसा ही है। कांग्रेस ने इसकी उच्चसतरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि जिलाधिकारी सी रविशंकर की आदेश पर बहुत ही हल्की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। जबकि इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून और हत्या जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। क्योंकि, जांच सही ना होने के कारण कोरोना संक्रमण फैला है और इसके कारण हरिद्वार और देश के विभिन्न इलाकों में लोगों की कोरोना से जान गई है।

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इन पांच गलतियों से पकड़ा गया कुंभ का घोटाला
सीएमओ हरिद्वार की ओर से हुए मुकदमे में पांच बातों का जिक्र किया गया है जिनसे इस महाघोटाले का पर्दाफाश हुआ है।

1— कोरोना के अधिकतर सैंपल निगेटिव दिखाए, जिससे पॉजिटिविटी रेट 0.18 प्रतिशत आया जो बहुत कम था।

2— सेंपल कलेक्टर्स भी शुरुआती जांच में फर्जी पाए गए और इनकी एंट्री भी फर्जी की गई।

3— कुंभ मेला समाप्त होने के बाद भी की जाती रही एंट्री, करीब 51 हजार एंट्री कुंभ मेला होने के बाद की गई।

4— एक ही फोन नंबर पर और एक ही आईडी पर हजारों लोगों के सैंपल भर दिए, जो बड़ा फर्जीवाडा था।

5— मैक्स कोरपोरेट सोसायटी, नालवा लैब और डा. लालचंदानी लैब ने सैंपल की अधिकतर एंट्री उत्तराखण्ड से बाहर की है, जिसमें राजस्थान और उत्तर प्रदेश से सबसे ज्यादा एंट्री हुई, जो पूरी तरह फर्जी पाया गया।

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क्या बोली कांग्रेस
कांग्रेस के दलित नेता डा. विशाल राठौर ने कहा कि पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। घोटाला पंजाब के एक जागरुक नागरिक के कारण सामने आया है। राज्य सरकार ने जिलाधिकारी सी रवशिंकर को ही इसकी जांच सौंप दी है, जो समझ से परे हैं। इसमें सीबीआई या बडी एजेंसी से जांच कराई जानी चाहिए। यही नहीं जो मुकदमा दर्ज किया है, वो भी हल्की धाराओं में किया गया हैं कोरोना जैसी महामारी को आपदा में अवसर बनाकर लोगों की जान से खिलवाड किया गया है। इसलिए इसमें एनएसए और हत्या व हत्या के प्रयास जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। सरकार के रवैये से लगता है कि दोषी अफसरों और नेताओं को बचाने का प्रयास हो रहा है।

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