अतीक साबरी:-
पिरान कलियर। घने जंगल के बीच स्थित ऐतिहासिक दरगाह शाह मंसूर का तीन दिवसीय सालाना उर्स बुधवार को चादरपोशी और झंडा चढ़ाने की धार्मिक रस्म के साथ विधिवत शुरू हो गया। उर्स के मौके पर कलियर से सभासद गुलफाम साबरी और मेहरबान साबरी के नेतृत्व में सैकड़ों जायरीनों का जत्था चादर और झंडा लेकर पैदल दरगाह शाह मंसूर पहुंचा। जत्थे में शामिल अकीदतमंदों का रास्ते में पड़ने वाले विभिन्न गांवों में ग्रामीणों ने फूल-मालाओं से स्वागत किया।
दरगाह पर पहुंचने के बाद उर्स कमेटी की ओर से जायरीनों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इसके बाद अकीदतमंदों ने पूरी अकीदत के साथ दरगाह पर चादरपोशी और झंडा चढ़ाया। इस दौरान देश में अमन-शांति, खुशहाली, एकता और भाईचारे के लिए दुआ की गई। चादरपोशी के साथ ही दरगाह पर तीन दिवसीय सालाना उर्स का विधिवत आगाज हो गया।
उर्स के दौरान दरगाह पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें चादरपोशी, महफिल-ए-शमा, कुल शरीफ और बड़ी दुआ प्रमुख रूप से शामिल हैं। उर्स को लेकर दरगाह कमेटी की ओर से तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में अकीदतमंद दरगाह पर पहुंच रहे हैं।
बताया जाता है कि घने जंगल के बीच स्थित शाह मंसूर की दरगाह करीब एक हजार वर्ष से भी अधिक पुरानी मानी जाती है। मान्यता है कि शाह मंसूर ने इसी जंगल में तप किया था, जिसके चलते उनकी दरगाह जंगल के बीच स्थित है। स्थानीय रिवायत और ग्रामीणों की मान्यता के अनुसार उर्स के दौरान जंगल का राजा शेर भी दरगाह पर हाजिरी लगाने आता है। दरगाह पर अकीदतमंदों की ओर से मुर्गे की नियाज भी पेश की जाती है।