कलियर करोड़ों की रकम फिर भी बदहाल कलियर! बकायादारों से सात करोड़ कब वसूलेंगे जिम्मेदार?

News129:-पिरान कलियर

पिरान कलियर। विश्व प्रसिद्ध दरगाह साबिर पाक की पहचान देश-दुनिया तक है। हर साल बड़ी संख्या में जायरीन यहां पहुंचते हैं, लेकिन दरगाह के खातों में करोड़ों रुपये की राशि होने और बड़ी रकम बकाया होने की जानकारी सामने आने के बाद अब सवाल सिर्फ रुपयों का नहीं, बल्कि कलियर में मिलने वाली सुविधाओं और उन पर होने वाले खर्च का है।

आरटीआई से सामने आई जानकारी के मुताबिक दरगाह के खातों में 62 करोड़ 11 लाख चार हजार 115 रुपये 80 पैसे जमा हैं, जबकि वर्ष 2009 से 2026 तक करीब 60 बकायादारों पर लगभग सात करोड़ रुपये बकाया बताए गए हैं।ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब दरगाह के पास इतनी बड़ी धनराशि उपलब्ध है और करोड़ों रुपये की वसूली अभी बाकी है, तो पिरान कलियर की बुनियादी तस्वीर क्यों नहीं बदल पा रही है? बकाया रकम की वसूली के लिए अब तक क्या ठोस कार्रवाई हुई और कितनी राशि वास्तव में वसूल की गई, इसका सार्वजनिक हिसाब सामने आना चाहिए।

सफाई से लेकर बिजली-पानी तक सवालों के घेरे में कलियर में सफाई व्यवस्था, नालियों की स्थिति, पेयजल, बिजली और सड़कों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। उर्स जैसे बड़े आयोजन में देशभर से जायरीन पहुंचे, लेकिन इसके बावजूद कई जगह मूलभूत व्यवस्थाओं को लेकर परेशानी सामने आई।

उर्स समाप्त होने के बाद भी मेला क्षेत्र में गंदगी और चोक नालियों को लेकर शिकायतें सामने आईं। ऐसे में सवाल उठता है कि करोड़ों रुपये की उपलब्धता और व्यवस्थाओं पर होने वाले खर्च का फायदा आखिर जमीन पर कब दिखाई देगा?

कलियर को कॉलेज और बड़े अस्पताल की भी दरकार कलियर की समस्या केवल उर्स या दरगाह परिसर की व्यवस्थाओं तक सीमित नहीं है। क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से मांग है कि यहां बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित हों। युवाओं के लिए उच्च शिक्षा की पर्याप्त व्यवस्था हो और स्थानीय लोगों व जायरीनों के लिए बड़े अस्पताल जैसी स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध हो।

एक ओर कलियर देश-विदेश से आने वाले जायरीनों के कारण धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर महत्वपूर्ण स्थान रखता है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं की कमी उसके विकास पर सवाल खड़े करती है। उत्तराखंड सरकार भी पिरान कलियर को महत्वपूर्ण धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में दर्ज करती है और यहां हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

बकायादारों पर शिकंजा कसे, आय-व्यय का हिसाब हो सार्वजनिकअब जरूरत इस बात की है कि वर्षों से लंबित करीब सात करोड़ रुपये के बकाये की बकायादारवार समीक्षा और प्रभावी वसूली की जाए। साथ ही दरगाह की आय, खर्च, टेंडर, कार्यों की गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता बढ़ाई जाए।

करोड़ों की रकम खातों में और जमीन पर सुविधाओं का संकट—यह विरोधाभास अब सवाल बन चुका है। जायरीनों और स्थानीय लोगों को सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि उन आंकड़ों का असर साफ-सफाई, सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा के रूप में जमीन पर दिखाई देना चाहिए।