कन्या गुरुकुल देहरादून की को हरिद्वार में शिफ्ट करने की योजना, क्या बेशकीमती जमीन पर है नजर?

नौ जून को कुलपति की अध्यक्षता में होनी है बैठक लिया जा सकता है बड़ा फैसला

विभागों के स्थानांतरण के फैसले से उठा बड़ा सवाल, छात्राओं और शिक्षकों ने खोला मोर्चा

देहरादून/हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा कन्या गुरुकुल देहरादून के हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और इतिहास विभागों की कक्षाओं को हरिद्वार स्थित महिला परिसर में स्थानांतरित करने के निर्णय के बाद विवाद गहराता जा रहा है। पहले शिक्षकों ने इस फैसले पर सवाल उठाए थे, अब छात्राओं ने भी खुलकर विरोध शुरू कर दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या 100 वर्ष से अधिक पुराने कन्या गुरुकुल देहरादून की बेशकीमती भूमि पर किसी की नजर है?

छात्राओं द्वारा जारी प्रेस ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन केवल चार विभागों को ही नहीं, बल्कि भविष्य में पूरे कन्या गुरुकुल देहरादून परिसर को हरिद्वार शिफ्ट करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। छात्राओं का कहना है कि यदि ऐसा होता है तो यह महिला शिक्षा की एक ऐतिहासिक धरोहर को समाप्त करने जैसा होगा।

दान में मिली थी जमीन, आज करोड़ों की संपत्ति

जानकारों के अनुसार कन्या गुरुकुल देहरादून की स्थापना महिला शिक्षा के उद्देश्य से की गई थी और इसके लिए समाजसेवियों एवं दानदाताओं ने भूमि उपलब्ध कराई थी। समय के साथ देहरादून शहर के विस्तार और बढ़ती जमीन की कीमतों के कारण यह भूमि अब अत्यंत मूल्यवान मानी जाती है। ऐसे में परिसर को खाली कराने और गतिविधियों को हरिद्वार स्थानांतरित करने की चर्चा ने कई तरह की आशंकाओं को जन्म दे दिया है।

विरोध कर रहे शिक्षकों और छात्राओं का कहना है कि यदि परिसर को धीरे-धीरे निष्क्रिय किया गया तो भविष्य में जमीन के उपयोग को लेकर विवाद खड़ा हो सकता है। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

छात्राओं का आरोप, पढ़ाई के बीच बदल रहे नियम

प्रेस ज्ञापन में छात्राओं ने कहा है कि उन्होंने अपनी परिस्थितियों और शैक्षणिक आवश्यकताओं को देखते हुए देहरादून परिसर में प्रवेश लिया था। अब पढ़ाई के बीच विभागों को दूसरे शहर में स्थानांतरित करना उनके भविष्य और शैक्षणिक व्यवस्था को प्रभावित करेगा। छात्राओं ने इसे उनके साथ अन्याय बताते हुए हर स्तर पर विरोध करने की चेतावनी दी है।

9 जून को हो सकता है बड़ा फैसला

सूत्रों के अनुसार 9 जून को कुलपति की अध्यक्षता में गठित समिति की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें विभागों और परिसर के भविष्य को लेकर अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। इस बैठक पर छात्राओं, शिक्षकों और पूर्व छात्रों की नजरें टिकी हुई हैं।

शिक्षकों ने भी बनाई रणनीति

कन्या गुरुकुल को बचाने के मुद्दे पर 10 जून को शिक्षकों की आम सभा भी प्रस्तावित है। बताया जा रहा है कि इस बैठक में आगे की रणनीति, कानूनी विकल्प और आंदोलन की रूपरेखा पर चर्चा की जाएगी।

पहले भी उठते रहे हैं सवाल

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की संपत्तियों और भूमि प्रबंधन को लेकर अतीत में भी विवाद और आरोप सामने आते रहे हैं। ऐसे में कन्या गुरुकुल देहरादून से जुड़े इस नए विवाद ने एक बार फिर विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्णयों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

फिलहाल छात्राओं और शिक्षकों का स्पष्ट कहना है कि वे 100 वर्ष पुरानी इस संस्था को समाप्त या स्थानांतरित नहीं होने देंगे। वहीं सभी की निगाहें अब 9 जून को होने वाली समिति की बैठक और विश्वविद्यालय प्रशासन के आधिकारिक रुख पर टिकी हैं।